भारतीय शेयर बाजार में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के प्रति खुदरा निवेशकों का उत्साह चरम पर है, लेकिन लिस्टिंग के दिन ऊंची कीमतों पर दांव लगाना रिटेल निवेशकों के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो रहा है। हालिया बाजार आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में जिन मल्टीबैगर आईपीओ ने लिस्टिंग के दिन 90 से 180 प्रतिशत का भारी प्रीमियम दर्ज किया, उनमें से अधिकांश शेयर आज अपने लिस्टिंग-डे हाई (Listing Day High) से 75 प्रतिशत तक टूट चुके हैं। 'फॉर्मो' (FOMO - छूट जाने का डर) के चक्कर में लिस्टिंग के दिन उच्चतम स्तर पर प्रवेश करने वाले निवेशकों के पोर्टफोलियो में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, प्राथमिक बाजार में अलॉटमेंट पाने वाले निवेशक तो अभी भी 22 से 134 प्रतिशत तक के ठोस मुनाफे में हैं, लेकिन द्वितीयक बाजार में लिस्टिंग के दिन प्रवेश करने वाले खरीदार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। उदाहरण के तौर पर विभोर स्टील ट्यूब्स, यूनिकॉमर्स ई-सॉल्यूशंस और बजाज हाउसिंग फाइनेंस जैसे चर्चित शेयर अपने लिस्टिंग के दिन के सर्वकालिक उच्च स्तर से 48 से 75 फीसदी तक नीचे आ चुके हैं। कुछ इक्के-दुक्के मामलों (जैसे केआरएन हीट एक्सचेंजर) को छोड़कर, लिस्टिंग वाले दिन पीक वैल्यूएशन पर की गई खरीदारी ने निवेशकों की पूंजी में बड़ी सेंध लगाई है।
मार्केट एक्सपर्ट्स ने आम निवेशकों को आगाह किया है कि लिस्टिंग के दिन अत्यधिक प्रीमियम पर कारोबार कर रहे शेयरों में बिना गहन वित्तीय विश्लेषण के प्रवेश करने से बचें। केवल आईपीओ हाइप के आधार पर निर्णय लेने के बजाय कंपनी के मौलिक आधार (Fundamentals) और दीर्घकालिक वैल्यूएशन को समझकर ही निवेश की रणनीति बनानी चाहिए।