आगामी त्यौहारी सीजन के दौरान आम जनता को महंगाई से राहत देने और देश भर में खाद्य तेलों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के कच्चे (Crude) और रिफाइंड एडिबल ऑयल पर प्रभावी आयात शुल्क (Customs Duty) में उल्लेखनीय कटौती की घोषणा की है। अधिसूचना के अनुसार, यह नई संशोधित दरें 24 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गई हैं, जिससे प्रसंस्करण कंपनियों और खाद्य तेल वितरकों के लिए आयात लागत में सीधी कमी देखने को मिलेगी।
संशोधित कर दरों के तहत कच्चे सोयाबीन व क्रूड पाम ऑयल पर बुनियादी शुल्क को 10% से घटाकर 5% कर दिया गया है, जबकि क्रूड सनफ्लावर ऑयल पर आयात शुल्क को शून्य कर दिया गया है। इसी प्रकार, रिफाइंड पाम और सोयाबीन तेल पर शुल्क 32.5% से घटाकर 27.5% और रिफाइंड सनफ्लावर तेल पर 22.5% कर दिया गया है। भारत अपनी घरेलू जरूरतों का लगभग 60% खाद्य तेल इंडोनेशिया, मलेशिया और अर्जेंटीना जैसे देशों से आयात करता है। त्योहारी अवधि में मिठाइयों, स्नैक्स और प्रोसेस्ड फूड की मांग में बढ़ोतरी को देखते हुए इस कदम से बाजार में तरलता बनी रहेगी।
हालांकि, आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि खुदरा बाजारों में कीमतों में गिरावट आने में कुछ समय लग सकता है। खुदरा दरें काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी कीमतों, अमेरिकी डॉलर-रुपये की विनिमय दर और एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों के पास मौजूद पुराने इन्वेंट्री स्टॉक पर निर्भर करेंगी। इसके अतिरिक्त, सरकार के समक्ष उपभोक्ताओं को किफायती दरों पर सामग्री उपलब्ध कराने और दूसरी ओर घरेलू तिलहन किसानों (विशेषकर सोयाबीन व सरसों उत्पादकों) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की भी बड़ी चुनौती है।