बनारस न्यूज डेस्क: काशी के आसमान में बुधवार को ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने नमो घाट पर मौजूद लोगों को रोमांचित कर दिया। गंगा के ऊपर भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने रिहर्सल के दौरान अपनी ताकत और हवाई करतब दिखाए। 22, 23 और 25 अक्टूबर को होने वाले हवाई प्रदर्शन से पहले हुई इस रिहर्सल में स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस सबसे बड़े आकर्षणों में रहा। तेजस की तेज रफ्तार उड़ान और कलाबाजियों को लोग एकटक देखते रहे। वहीं, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल ने त्रिशूल जैसी आकृति बनाकर उड़ान भरी।
रिहर्सल के दौरान गंगा के ऊपर आसमान तिरंगे के रंगों से सज गया। सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम के विमानों ने केसरिया, सफेद और हरे रंग का धुआं छोड़कर शानदार नजारा पेश किया। दूसरी ओर, घाटों पर 'कंधों से मिलते हैं कंधे' और 'संदेशे आते हैं' जैसे देशभक्ति गीत गूंजते रहे। गंगा की लहरों, देशभक्ति गीतों और विमानों के करतबों ने इस रिहर्सल को खास बना दिया। छह लड़ाकू विमानों के एरोहेड फॉर्मेशन ने भी लोगों का ध्यान खींचा। इस फॉर्मेशन में विमान तीर के अगले हिस्से जैसी आकृति बनाते हैं।
मिराज-2000, जगुआर और चिनूक ने भी दिखाए करतब
रिहर्सल में मिराज-2000 और जगुआर विमानों की उड़ान ने भारतीय वायुसेना के पुराने अभियानों की याद दिलाई। दोनों विमानों ने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर में हिस्सा लिया था। मिराज-2000 ने 2019 के बालाकोट हवाई हमले में भी अहम भूमिका निभाई थी, जिसे ऑपरेशन बंदर के नाम से जाना जाता है। इसके अलावा, पुराने दौर के हार्वर्ड विमान ने हवाई करतब दिखाए, जबकि भारी सामान और सैनिकों को ले जाने में सक्षम चिनूक हेलीकॉप्टर ने गंगा के ऊपर उड़ान भरी। चिनूक के आगे और पीछे लगे दो बड़े रोटर इसकी खास पहचान हैं।
मुख्य एयर शो में दिखेगा वायुसेना का दम
रिहर्सल ने आने वाले हवाई प्रदर्शन की एक झलक पेश की। प्रस्तावित कार्यक्रम में सुखोई-30 एमकेआई, राफेल, जगुआर, मिराज-2000, एलसीए तेजस और मिग-29 को छह विमानों के एरोहेड फॉर्मेशन में शामिल किया गया है। कारगिल युद्ध के दौरान चलाए गए ऑपरेशन सफेद सागर में भारतीय वायुसेना ने दुर्गम पहाड़ी इलाकों में अभियान चलाया था। वहीं, 26 फरवरी 2019 को बालाकोट में किए गए हवाई हमले में मिराज-2000 विमानों का इस्तेमाल हुआ था। नमो घाट पर हुई रिहर्सल ने काशी के आसमान में होने वाले मुख्य प्रदर्शन को लेकर लोगों का उत्साह बढ़ा दिया है।