भारत के तेजी से बढ़ते कमोडिटी बाजार को अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ अधिक प्रभावी तरीके से जोड़ने की जरूरत है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एमसीएक्स) की प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीणा राय ने कहा कि देश की बढ़ती आर्थिक भूमिका को देखते हुए घरेलू कमोडिटी बाजारों में बेहतर मूल्य खोज और जोखिम प्रबंधन व्यवस्था विकसित करना जरूरी है।
ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव 2026 में अपने संबोधन के दौरान राय ने कहा कि भारत कई प्रमुख जिंसों का बड़ा उत्पादक होने के साथ-साथ सोने और कच्चे तेल जैसे उत्पादों का प्रमुख उपभोक्ता भी है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतों में होने वाला बदलाव भारतीय कारोबार और उद्योगों को सीधे प्रभावित करता है।
उन्होंने बताया कि देश का कमोडिटी बाजार उत्पादन और आयात के लिहाज से करीब 50 लाख करोड़ रुपये का है। इसके बावजूद बाजार का जीडीपी के मुकाबले अनुपात विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम है। उनके अनुसार यह स्थिति घरेलू कमोडिटी बाजारों के विस्तार की बड़ी संभावनाओं को दर्शाती है।
भारत स्टील, एल्युमिनियम, कोयला और कपास जैसी वस्तुओं के उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। वहीं ऊर्जा और कीमती धातुओं की घरेलू मांग भी काफी अधिक है। इसलिए कारोबारियों और उद्योगों के लिए कीमतों में अचानक होने वाले बदलाव से बचाव के बेहतर साधन उपलब्ध कराना आवश्यक है।
राय ने कहा कि मजबूत घरेलू बाजार, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और प्रभावी हेजिंग तंत्र भारतीय कारोबार को वैश्विक उतार-चढ़ाव से निपटने में मदद कर सकते हैं। रुपये में हेजिंग और मुद्रा जोखिम प्रबंधन को भी इस दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया। सम्मेलन में भारतीय कमोडिटी बेंचमार्क, मूल्य खोज, सर्राफा, बेस मेटल, ऊर्जा, कृषि जिंस और कोयला बाजार पर चर्चा की जा रही है। इसके अलावा तकनीक, खुदरा निवेशकों की भागीदारी और जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों को भी विशेषज्ञों के विचार-विमर्श में शामिल किया गया है।