वाराणसी: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े कथित कानूनी विवाद में बुधवार, 10 जून, 2026 को एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। शंकराचार्य के खिलाफ अदालत में परिवाद दायर करने वाले मुख्य शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने मीडिया के सामने आकर सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार कर लिया है कि उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के ऊपर जो मुकदमा दर्ज कराया था, वह पूरी तरह से फर्जी, मनगढ़ंत और प्रायोजित था।
आशुतोष ब्रह्मचारी ने सीधे तौर पर अपने ही गुरु भाई रामचंद्र दास पर इस पूरी साजिश को रचने और दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है।
साजिश के पीछे कई रसूखदार चेहरे शामिल
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पर जारी अपने वीडियो बयान में आशुतोष ब्रह्मचारी ने रुआंसे सुर में कहा, "मैं सनातन धर्म और देश की जनता के सामने यह सच स्वीकार कर रहा हूँ कि पूज्य शंकराचार्य जी के खिलाफ जो भी कानूनी शिकायतें की गईं, वे आधारहीन थीं। मुझे मोहरा बनाया गया था। यह सब कुछ मेरे गुरु भाई रामचंद्र दास के इशारे और उनके कहने पर किया गया था।"
उन्होंने आगे एक बड़ा राजनीतिक और आध्यात्मिक विस्फोट करते हुए दावा किया:
"इस फर्जी मुकदमेबाजी और पूज्य पीठ को बदनाम करने की साजिश में केवल रामचंद्र दास ही अकेले नहीं हैं। इसमें पर्दे के पीछे से खेल रहे कई अन्य शक्तिशाली लोग और कुछ रसूखदार चेहरे भी शामिल हैं। मैं बहुत जल्द उन सभी के नामों का दस्तावेजी सबूतों के साथ सार्वजनिक रूप से पर्दाफाश और खुलासा करूंगा।"
'अगर मुझे कुछ हुआ, तो रामचंद्र दास होंगे जिम्मेदार'
सच उजागर करने के साथ ही आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपनी जान को गंभीर खतरा होने की आशंका भी जताई है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और पुलिस से तत्काल सुरक्षा की मांग करते हुए कहा, "इस सच को सामने लाने के बाद मेरी जान को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। अगर आने वाले दिनों में मेरे साथ कोई अप्रिय घटना होती है, मुझे शारीरिक नुकसान पहुँचता है या मेरी हत्या होती है, तो उसका सीधा और एकमात्र जिम्मेदार मेरा गुरु भाई रामचंद्र दास ही होगा।"
पीठ और समर्थकों में भारी आक्रोश
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद ज्योतिष पीठ के संतों, मठाधीशों और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के करोड़ों समर्थकों में रामचंद्र दास और उनके सहयोगियों के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है। पीठ के विधिक सलाहकारों (लीगल टीम) का कहना है कि यह न केवल देश के सर्वोच्च आध्यात्मिक पद को धूमिल करने की आपराधिक साजिश है, बल्कि न्यायालय (कोर्ट) को गुमराह करने का भी एक गंभीर मामला है। समर्थकों ने मांग की है कि इस कबूलनामे के आधार पर पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज कर रामचंद्र दास को गिरफ्तार करना चाहिए ताकि इस गहरी साजिश की तह तक पहुँचा जा सके।