नई दिल्ली: मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव को लेकर देश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग) ने सूबे की एकमात्र कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन-पत्र निरस्त किए जाने के संवेदनशील मामले पर संज्ञान लिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस कूटनीतिक गतिरोध पर विस्तृत चर्चा करने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल को बुधवार दोपहर 12 बजे का समय दिया है। इससे पहले मंगलवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस आकस्मिक फैसले के विरोध में निर्वाचन सदन के बाहर संक्षिप्त धरना भी दिया था, जिसके बाद आयोग ने औपचारिक पत्र भेजकर पार्टी से मुलाकात के लिए अपने डेलिगेट्स (सदस्यों) की सूची मांगी है।
दरअसल, भोपाल में आगामी 18 जून को होने वाले द्विवार्षिक राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर ने मंगलवार को स्क्रूटनी (जांच) के दौरान मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी को खारिज कर दिया था। भाजपा उम्मीदवार महेश केवट की आपत्ति के बाद यह कार्रवाई की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि नटराजन ने अपने हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत से जुड़े कानूनी मामले की जानकारी जानबूझकर छिपाई है। हालांकि, कांग्रेस ने इन आरोपों को मनगढ़ंत बताते हुए कहा है कि वह कोई आपराधिक मामला या एफआईआर नहीं थी, बल्कि केवल ₹10 करोड़ के मुआवजे का एक सामान्य कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस था, जिसे सुप्रीम कोर्ट के नियमों के तहत हलफनामे में दर्शाना अनिवार्य नहीं था। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने सत्तारूढ़ भाजपा पर 'सीट चोरी' करने की गहरी साजिश रचने का आरोप लगाया है। 230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्तमान प्रभावी संख्या बल के लिहाज से भाजपा के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। भाजपा द्वारा तीन उम्मीदवार मैदान में उतारने और कांग्रेस का फॉर्म खारिज होने के बाद अब सूबे की तीसरी सीट का मुकाबला पूरी तरह त्रिशंकु हो गया है, जिससे दोनों धड़ों में शह और मात का खेल चरम पर पहुंच गया है।