बनारस न्यूज डेस्क: सावन के दूसरे सोमवार को वाराणसी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। गोदौलिया से लेकर घाटों तक और बाबा विश्वनाथ धाम की ओर जाने वाली लगभग हर सड़क पर भक्तों की लंबी कतारें नजर आईं। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई थी और घंटों इंतजार के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। पूरे इलाके में लगातार हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे।
बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु काशी पहुंचे। जापान और अमेरिका से आए भक्त भी कतार में खड़े होकर हर-हर महादेव का जयघोष करते दिखाई दिए। वहीं कई श्रद्धालु अलग-अलग धार्मिक रूप में नजर आए। किसी ने शरीर पर भभूत लगाई थी तो कोई गले में मानव खोपड़ी के प्रतिरूप वाली माला और शिवलिंग धारण किए हुए था।
दर्शन के लिए कतार में लगे श्रद्धालुओं के बीच एक औघड़ बाबा भी नजर आए। उन्होंने लोगों को संदेश देते हुए कहा, “ओम नमो नारायण। शिव को पहचानो, अपने आपको जानो।” उनका कहना था कि खुद को समझने के बाद ही शिव को पहचानने का रास्ता खुलता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से शिव की भक्ति के साथ अपनी मां की सेवा करने की भी अपील की।
सावन के मौके पर इस बार पश्चिम बंगाल, बिहार और असम से बड़ी संख्या में कांवड़िए भी काशी पहुंचे। बच्चों में भी बाबा के दर्शन को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। प्रयागराज से दादा-दादी के साथ आए पांच वर्षीय कौशल और सात वर्षीय नंदिनी कंधे पर गंगाजल लेकर काशी पहुंचे। दोनों ने करीब चार से पांच घंटे कतार में खड़े रहने के बाद बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए।
काशी में कई डाक बम भी बिना डीजे और किसी तामझाम के शांत तरीके से यात्रा करते नजर आए। हालांकि, गंगा स्नान के बाद दर्शन के लिए कतार में लगे कुछ कांवड़ियों ने गर्मी और उमस को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि दूसरे धार्मिक स्थलों पर लंबी कतारों में एसी या ठंडी हवा की व्यवस्था रहती है, जबकि काशी में तेज गर्मी और उमस के बीच घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।