कनाडा सरकार ने बच्चों की सुरक्षा और डिजिटल दुनिया में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बेहद कड़ा और बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने संसद में एक नया विधेयक (Bill) पेश किया है, जिसके तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, इस बिल के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से चलने वाले चैटबॉट्स को भी विनियमित (Regulate) करने की तैयारी की गई है।
कनाडा के नवप्रवर्तन, विज्ञान और उद्योग मंत्री (Innovation, Science and Industry Minister) फ्रैंकोइस-फिलिप शैम्पेन ने इस बिल की घोषणा करते हुए कहा, "हमारा उद्देश्य हमारे बच्चों की मानसिक सेहत की रक्षा करना और टेक कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म के लिए जवाबदेह बनाना है।"
विधेयक की मुख्य बातें और कड़े प्रावधान
कनाडा सरकार द्वारा पेश किए गए इस नए कानून में बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं:
- 16 वर्ष से कम उम्र पर प्रतिबंध: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। इसके लिए कंपनियों को मजबूत 'एज वेरिफिकेशन' (उम्र की पुष्टि करने वाली) तकनीक का इस्तेमाल करना होगा।
- एआई चैटबॉट्स पर नियंत्रण: यह बिल केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। इसमें ओपनएआई के चैटजीपीटी (ChatGPT) और गूगल के जेमिनी (Gemini) जैसे एआई चैटबॉट्स को भी दायरे में लाया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ये एल्गोरिदम बच्चों के लिए सुरक्षित सामग्री ही परोसें।
- भारी जुर्माने का प्रावधान: यदि कोई टेक कंपनी इन नियमों का उल्लंघन करती है या बच्चों की उम्र को वेरिफाई करने में नाकाम रहती है, तो उस पर भारी वित्तीय जुर्माना लगाया जाएगा।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता
कनाडा सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया की लत, साइबर बुलिंग (इंटरनेट पर प्रताड़ना) और एल्गोरिदम द्वारा दिखाई जाने वाली हानिकारक सामग्री के कारण किशोरों में अवसाद (Depression) और चिंता (Anxiety) के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस कानून का मकसद बच्चों को इन डिजिटल खतरों से दूर रखकर एक सुरक्षित माहौल देना है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ता दबाव
कनाडा अकेला ऐसा देश नहीं है जो इस तरह का कदम उठा रहा है। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने का कानून पास कर चुका है। इसके अलावा अमेरिका के कई राज्यों और यूरोपीय संघ (EU) में भी बच्चों के स्क्रीन टाइम और डेटा प्राइवेसी को लेकर कड़े नियम बनाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बिल पास हो जाता है, तो यह वैश्विक टेक दिग्गजों (जैसे मेटा, टिकटॉक और गूगल) के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा, क्योंकि उन्हें कनाडा में अपना कामकाज जारी रखने के लिए अपने सिस्टम में बड़े तकनीकी बदलाव करने होंगे।