हालांकि, अमेरिकी शहरों पर ईरान के हमले की तैयारी या ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल के अंत तक युद्ध खींचने की योजना जैसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। इन्हें फिलहाल रिपोर्ट में किए गए दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
अब तक अरब क्षेत्र में रहा ईरान का फोकस
अमेरिका के साथ टकराव के दौरान ईरान ने मिसाइल और ड्रोन क्षमता का इस्तेमाल किया है। उसके जवाबी हमलों का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अमेरिकी सहयोगी देशों से जुड़े लक्ष्यों पर केंद्रित रहा है।
ईरान की रणनीति का उद्देश्य एक तरफ अमेरिकी सैन्य दबाव का जवाब देना और दूसरी तरफ अपने क्षेत्र में सीधे बड़े पैमाने पर नुकसान से बचना रहा है।
क्या अमेरिकी शहर हो सकते हैं अगला निशाना?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अब अपनी रणनीति को और आक्रामक बनाने पर विचार कर रहा है और संघर्ष का दायरा अरब देशों से आगे बढ़ाकर अमेरिकी क्षेत्र तक ले जाने की तैयारी कर रहा है।
अगर ऐसा होता है तो यह मौजूदा संघर्ष में बेहद बड़ा बदलाव होगा, क्योंकि अमेरिकी मुख्य भूमि को निशाना बनाना दोनों देशों के बीच तनाव को एक नए और कहीं अधिक खतरनाक स्तर पर पहुंचा सकता है।
ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता बनी चुनौती
ईरान के पास बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का बड़ा शस्त्रागार है। संघर्ष के दौरान उसने इन हथियारों के जरिए अपनी जवाबी हमला करने की क्षमता प्रदर्शित करने की कोशिश की है।
लेकिन किसी भी सैन्य संघर्ष में केवल हथियारों की संख्या ही निर्णायक नहीं होती। लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता, एयर डिफेंस, खुफिया जानकारी और हमलों की निरंतरता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
दावों को लेकर सावधानी जरूरी
ईरान की कथित नई रणनीति को लेकर सामने आ रही खबरों में कई बातें विश्लेषण और अनुमान पर आधारित हो सकती हैं। इसलिए अमेरिकी शहरों पर संभावित हमले या लंबे युद्ध की कथित योजना को पुष्ट तथ्य के रूप में पेश करना अभी जल्दबाजी होगी।