सौर मंडल के अवशेषों के रूप में अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहे क्षुद्रग्रह (Asteroids) पृथ्वी के अस्तित्व के लिए सदैव से एक संभावित खतरा बने हुए हैं। 4.6 अरब वर्ष पूर्व बने ये आकाशीय पिंड जब पृथ्वी की कक्षा को पार करते हैं, तो टकराव की स्थिति में भयानक तबाही की आशंका उत्पन्न हो जाती है। इस वैश्विक खतरे से निपटने और 'प्लेनेटरी डिफेंस' (Planetary Defense) को मजबूत करने के लिए दुनिया की दो प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियां भिन्न रणनीतियों पर कार्य कर रही हैं। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) जहाँ गतिज प्रभाव (Kinetic Impactor) तकनीक पर निर्भर है, वहीं चीनी वैज्ञानिक बड़े क्षुद्रग्रहों को नष्ट करने के लिए परमाणु विस्फोट आधारित रणनीतिक योजना पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
वर्ष 2022 में नासा ने अपने ऐतिहासिक DART (डबल एस्टेरॉयड रीडायरेक्शन टेस्ट) मिशन के माध्यम से अंतरिक्ष यान को जानबूझकर एक एस्टेरॉयड से टकराया था, जिससे उसकी गति में 2.7 मिलीमीटर प्रति सेकंड की कमी आई थी। यद्यपि छोटे और मध्यम आकार के एस्टेरॉयड का मार्ग बदलने के लिए यह तकनीक बेहद कारगर सिद्ध हुई है, किंतु विशालकाय और अचानक सामने आने वाले खतरों से निपटने में इसकी सीमाएं सामने आती हैं। इसके विपरीत, बीजिंग स्थित 'एकेडमी ऑफ लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी' के शोधकर्ताओं ने एक 'टू-स्टेप न्यूक्लियर मॉडल' का प्रस्ताव रखा है।
चीनी वैज्ञानिकों के इस प्रस्ताव के अंतर्गत सबसे पहले एक मेटल पेनिट्रेटर क्षुद्रग्रह की सतह में 30 मीटर गहरा गड्ढा बनाएगा, जिसके बाद दूसरा यान उस छेद में परमाणु पेलोड डालकर विस्फोट करेगा। कंप्यूटर सिमुलेशन के अनुसार, 30 मीटर की गहराई पर किया गया यह विस्फोट नासा के DART मिशन की तुलना में लगभग 110 गुना अधिक प्रभावी ऊर्जा हस्तांतरण सुनिश्चित करता है। हालांकि, गहरे अंतरिक्ष में परमाणु पेलोड ले जाने के लिए अत्यधिक शक्तिशाली हैवी-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल की आवश्यकता होगी। दोनों ही मॉडल वैश्विक खगोलविदों के लिए पृथ्वी की रक्षा हेतु नए तकनीकी द्वार खोल रहे हैं।