मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच शांति की उम्मीदों को एक बड़ा झटका लगा है। सोमवार, 20 अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष इशाक डार से फोन पर हुई बातचीत में अमेरिका पर 'सीजफायर के गंभीर उल्लंघन' और 'कूटनीतिक विश्वासघात' के गंभीर आरोप लगाए हैं। अराघची ने विशेष रूप से जून और मार्च 2025 की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि वाशिंगटन का इतिहास "भरोसा तोड़ने" वाला रहा है।
ईरान के कड़े आरोप और 'ब्लॉकडे' का विवाद
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका एक तरफ वार्ता का ढोंग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसने ईरान के तटों, बंदरगाहों और जहाजों के खिलाफ "नौसैनिक नाकेबंदी" (Naval Blockade) शुरू कर दी है। अराघची ने जोर देकर कहा, "अमेरिका की मांगें न केवल विरोधाभासी हैं, बल्कि बार-बार बदलती रहती हैं, जिससे उसकी नियत पर गहरा संदेह पैदा होता है।" हाल ही में अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी मालवाहक जहाज 'तौस्का' को रोके जाने के बाद तेहरान ने इसे कूटनीतिक पीठ में छुरा घोंपने जैसा बताया है।
शहबाज शरीफ की 'शांति एक्सप्रेस'
इस संकट को सुलझाने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सक्रियता बढ़ा दी है। रविवार देर रात उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से करीब 45 मिनट तक फोन पर चर्चा की। शरीफ ने ईरानी नेतृत्व को विश्वास दिलाया कि वे सऊदी अरब, कतर और तुर्की के नेताओं के साथ मिलकर एक स्थायी समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं। पाकिस्तान की कोशिश है कि 21 अप्रैल को खत्म हो रहे 14-दिवसीय अस्थायी संघर्षविराम को किसी भी तरह बढ़ाया जाए ताकि क्षेत्र एक महायुद्ध की आग में न झुलसे।
वार्ता पर संशय का बादल
भले ही अमेरिका ने अपने विशेष दूतों—जारेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ को इस्लामाबाद भेजने की पुष्टि की है, लेकिन ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने फिलहाल दूसरे दौर की औपचारिक बातचीत की खबरों को "भ्रामक" बताया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी "धमकी भरी भाषा" और "अवैध नाकेबंदी" बंद नहीं करता, तब तक कूटनीति का कोई अर्थ नहीं है।