वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर पिछले महीने सामने आई ईरान से जुड़ी कथित धमकी ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के बीच चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि, केंद्रीय खुफिया एजेंसी यानी सीआईए के विश्लेषकों ने इस खुफिया जानकारी की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए थे, इसके बावजूद राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था में असाधारण बदलाव किया गया और उनका विमान बदल दिया गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, यह जानकारी इजरायल की ओर से साझा की गई थी। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के एक वर्ग ने इसे पर्याप्त रूप से पुष्ट या निर्णायक नहीं माना। अधिकारियों के अनुसार, जानकारी अमेरिकी स्रोतों से सीधे प्राप्त होने के बजाय इजरायली इनपुट पर आधारित थी, इसलिए उसकी विश्वसनीयता को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती गई।
इसके बावजूद ट्रंप की यात्रा के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने जोखिम लेने से परहेज किया। तुर्की से ब्रिटेन के माइल्डेनहॉल एयर बेस की ओर रवाना होने से पहले राष्ट्रपति को नियमित एयर फोर्स वन से अलग सी-32ए सैन्य विमान में स्थानांतरित किया गया। यह बदलाव बेहद गोपनीय तरीके से किया गया।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति के विमान को संभावित कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल से निशाना बनाए जाने की विशिष्ट आशंका सामने आई थी। कथित तौर पर ईरानी तत्वों के पास ट्रंप की यात्रा से जुड़ी कुछ विस्तृत जानकारी होने के कारण खतरे को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया गया।
व्हाइट हाउस के अनुसार, राष्ट्रपति को ईरान से संबंधित आशंका के अलावा भी कई अन्य सुरक्षा खतरे मिले थे। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों ने सभी संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त उपाय किए। सीआईए ने रिपोर्ट में किए गए दावों पर आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार किया है। इजरायली दूतावास की ओर से भी तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
ट्रंप ने कहा कि विमान बदलने का निर्णय सुरक्षा अधिकारियों ने लिया था और उन्होंने उनके निर्देशों का पालन किया। घटनाक्रम से स्पष्ट है कि खुफिया सूचना की विश्वसनीयता पर संदेह होने के बावजूद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां राष्ट्रपति की सुरक्षा के मामले में किसी भी संभावित खतरे को नजरअंदाज करने के पक्ष में नहीं थीं।