इस्लामाबाद: पाकिस्तान में मानसून का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। 26 जून से जारी मूसलाधार बारिश, अचानक आई बाढ़ (Flash Floods) और जलभराव के कारण जान गंवाने वाले नागरिकों की संख्या बढ़कर 126 हो गई है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा जारी स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, ताजा हादसों में सिंध प्रांत के थारपारकर में तीन और रावलपिंडी में एक व्यक्ति की जान गई है। इसके अलावा देश के विभिन्न क्षेत्रों में अब तक 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
एनडीएमए के आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसूनी सीजन में सबसे अधिक तबाही खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब प्रांत में देखने को मिली है। खैबर पख्तूनख्वा में अब तक 55 और पंजाब में 47 लोगों की मौत दर्ज की गई है। मौतों का मुख्य कारण आकाशीय बिजली गिरना, करंट लगना, मकानों की छतें ढहना और उफनते नदी-नालों में डूबना रहा है। भारत के दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के ऊपर बने मजबूत कम दबाव वाले क्षेत्र (Low-Pressure System) और मानसूनी हवाओं के प्रभाव के चलते आगामी 4 अगस्त तक भारी से बेहद भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।
आपदा प्रबंधन एजेंसी ने रावलपिंडी, लाहौर, फैसलाबाद और कराची समेत पंजाब तथा सिंध के कई प्रमुख शहरों में शहरी बाढ़ (Urban Flooding) की गंभीर चेतावनी दी है। वहीं, डेरा गाजी खान के पहाड़ी क्षेत्रों और उत्तरी बलूचिस्तान के नदी-नालों में तेज जलभराव और भूस्खलन की संभावना जताई गई है। अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले निवासियों से सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।