अमेरिका, इजराइल और ईरान के त्रिकोणीय संघर्ष के चलते सुलग रहे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में शांति स्थापित करने और कूटनीतिक संतुलन बनाने के लिए भारत ने एक बार फिर अपनी वैश्विक भूमिका को मजबूती से रेखांकित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कुवैत के अमीर, महामहिम शेख मेशाल अल-अحمد अल-जाबेर अल सबाह से टेलीफोन पर उच्च स्तरीय संवाद स्थापित किया।
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस आपातकालीन बातचीत के दौरान दोनों शीर्ष नेताओं ने खाड़ी क्षेत्र में तेजी से बिगड़ते सुरक्षा परिदृश्य और गंभीर होते सैन्य संकट पर गहन चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में जारी हिंसा और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कुवैत की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता को निशाना बनाकर किए गए हालिया हवाई हमलों की स्पष्ट शब्दों में कड़े लहजे में भर्त्सना की।
पीएम मोदी ने दो टूक शब्दों में वैश्विक मंच का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित किया कि इस जटिल समस्या का स्थाई समाधान केवल युद्ध से नहीं, बल्कि तनाव कम करके आपसी बातचीत और कूटनीतिक (डिप्लोमैटिक) प्रयासों के जरिए ही संभव है, ताकि खाड़ी क्षेत्र में जल्द से जल्द स्थिरता बहाल हो सके। गौरतलब है कि यह महत्वपूर्ण कूटनीतिक फोन कॉल कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 पर हुए भीषण ड्रोन और मिसाइल हमले के ठीक बाद आया है, जिसमें वहां कार्यरत एक बेगुनाह भारतीय नागरिक की
असमय मौत हो गई थी और दर्जनों अन्य लोग घायल हो गए थे। पीएम मोदी ने कुवैत में रह रहे लगभग दस लाख भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा, उनके स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति व्यक्तिगत रूप से संवेदनशीलता दिखाने के लिए कुवैत के अमीर का सहृदय आभार व्यक्त किया। उन्होंने अमीर को आश्वस्त किया कि इस संकट की घड़ी में भारत हर प्रकार से कुवैत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। वहीं दूसरी तरफ, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद दोनों महाशक्तियों के बीच हिंसक पलटवार का दौर तेज हो गया है, जिसने इस पूरे क्षेत्र को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।