भारतीय ई-कॉमर्स जगत की उभरती शक्ति 'मीशो' (Meesho) के हालिया वित्तीय परिणामों ने निवेशकों को एक साथ उत्साह और सावधानी का संदेश दिया है। मार्च 2026 की तिमाही के नतीजों के सार्वजनिक होते ही शेयर बाजार में मीशो के प्रति जबरदस्त खरीदारी देखी गई, जिससे इसके शेयरों में 7% से अधिक की तेजी आई। कंपनी ने परिचालन राजस्व (Operational Revenue) में वार्षिक आधार पर 47.1% की शानदार वृद्धि दर्ज की है, जो 3,531 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है।
नतीजों का सबसे आकर्षक पहलू कंपनी के शुद्ध घाटे में आई भारी कमी है। पिछले वर्ष के मुकाबले घाटा 1,391 करोड़ रुपये से सिमटकर अब केवल 166 करोड़ रुपये रह गया है। सतह पर यह आंकड़ा किसी भी निवेशक को लुभाने के लिए पर्याप्त है, लेकिन वित्तीय विश्लेषकों ने आंकड़ों की गहराई में कुछ पेच की ओर इशारा किया है। जानकारों का मानना है कि पिछले वर्ष का घाटा एक 'असाधारण व्यय' (Exceptional Loss) के कारण अधिक दिख रहा था; यदि उसे हटाकर सामान्य तुलना की जाए, तो कंपनी का वास्तविक घाटा अभी भी चुनौती बना हुआ है।
एक और चिंताजनक पहलू कंपनी का फ्री कैश फ्लो (Free Cash Flow) है, जो पिछले 12 महीनों में सकारात्मक से गिरकर 633 करोड़ रुपये के नकारात्मक स्तर पर पहुंच गया है। यही कारण है कि HSBC जैसी दिग्गज ब्रोकरेज फर्मों ने शेयर की कीमत 200 रुपये के पार होने के बावजूद इसका 'टारगेट प्राइस' मात्र 185 रुपये रखा है और निवेशकों को 'होल्ड' करने की सलाह दी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लॉजिस्टिक खर्चों में कटौती और विज्ञापनों से बढ़ती आय ही भविष्य में मीशो को स्थायी मुनाफे की राह पर ले जा सकती है। 111 रुपये के आईपीओ भाव से शुरू हुआ यह सफर फिलहाल एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है