बनारस न्यूज डेस्क: बनारसी साड़ी का नाम सुनते ही अक्सर भारी-भरकम, मोटी जरी और ड्रेपिंग में लंबा वक्त लेने वाली साड़ियों की छवि उभरती थी, जिसे पहनने में 15 से 20 मिनट का समय लग जाता था। लेकिन बदलते फैशन और आधुनिक दौर की मांग को देखते हुए अब इसमें एक बड़ा बदलाव आया है। युवाओं, खासकर 15 से 30 वर्ष की युवतियों की पसंद और सुविधा को ध्यान में रखते हुए अब 'हल्की और पतली' बनारसी साड़ियां बाजार में छाई हुई हैं। यह नया स्वरूप पारंपरिक बनारसी लुक की भव्यता को बरकरार रखते हुए पहनने में बेहद आरामदायक और वजन में बहुत हल्का है।
इस बदलाव के पीछे बनारसी कारीगरों की विशेष रचनात्मकता है। बनारस के कारीगर मोहम्मद शाहीन बताते हैं कि उन्होंने पारंपरिक डिजाइनों को ही आधार बनाकर इन साड़ियों को बहुत ही महीन और 'कागज जितनी पतली' तैयार किया है। दिल्ली के प्रमुख बाजारों जैसे चांदनी चौक, करोल बाग और सदर बाजार में इन साड़ियों की जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है। इनका पल्लू और डिज़ाइन पूरी तरह से बनारसी शैली में ही है, लेकिन वजन में ये इतनी हल्की हैं कि इन्हें किसी भी पार्टी या इवेंट में कैरी करना बेहद आसान हो गया है।
नई पीढ़ी की लड़कियों के लिए यह साड़ी किसी वरदान से कम नहीं है। जहाँ पारंपरिक बनारसी साड़ी को पहनने और उसकी प्लेट्स बनाने में अच्छी-खासी मशक्कत करनी पड़ती थी, वहीं यह नई हल्की साड़ी महज 5 से 10 मिनट में आसानी से पहनी जा सकती है। इसके साथ आने वाले मैचिंग ब्लाउज और पेटीकोट इसे एक पूरा पैकेज बनाते हैं। हल्की होने के कारण, गर्मियों के मौसम में भी किसी शादी-समारोह में इसे लंबे समय तक बिना किसी थकान या परेशानी के पहना जा सकता है।
कीमत के मामले में भी यह नया ट्रेंड बेहद आकर्षक और किफायती है। जहाँ असली मोटी जरी वाली पारंपरिक बनारसी साड़ी अक्सर 9,000 रुपये से अधिक की होती है, वहीं ये ट्रेंडी हल्की साड़ियां 1,000 से 5,000 रुपये के बीच आसानी से उपलब्ध हैं। कई बार डिस्काउंट के बाद ये 1,500 रुपये तक की किफायती रेंज में भी मिल जाती हैं। कारीगरों का कहना है कि रोजाना इनकी अच्छी-खासी बिक्री हो रही है, जो इस बात का सबूत है कि आधुनिक फैशन में 'हल्का और स्टाइलिश' होना ही अब नई पहचान बन चुका है।