मुंबई: वैश्विक आर्थिक हलचलों और विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा अमेरिकी डॉलर की कड़ाई से बढ़ाई गई मांग के कारण अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार (Forex Market) में भारतीय रुपये को बड़ा झटका लगा है। बुधवार (01 जुलाई 2026) को विदेशी मुद्रा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया, जिसके चलते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 60 पैसे की विखंडनकारी गिरावट के साथ 95.16 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, यह चालू वर्ष में 18 जून के बाद का सबसे निचला और कड़ा स्तर है। इससे पिछले कारोबारी दिवस पर भारतीय मुद्रा मामूली रूप से पांच पैसे टूटकर 94.56 रुपये प्रति डॉलर पर स्थिर रही थी, लेकिन नए सत्र की शुरुआत से ही इस पर कड़ा दबाव देखा गया।
बुधवार सुबह रुपया पिछले बंद की तुलना में 11 पैसे कमजोर होकर 94.67 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। शुरुआती लॉजिस्टिक्स कारोबार के दौरान इसमें थोड़ा कूटनीतिक सुधार देखा गया और यह 94.60 के ऊपरी स्तर तक गया, परंतु आयातकों की ओर से डॉलर की विखंडनकारी और चौतरफा मांग बढ़ने से यह लगातार टूटता हुआ 95.29 रुपये के निचले स्तर तक विलेख रूप से गोता लगा गया। इस मंदी का मुख्य कारण दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के बास्केट में डॉलर सूचकांक (Dollar Index) का 0.1 प्रतिशत मजबूत होना रहा, जिसने उभरते बाजारों की मुद्राओं को कड़ाई से प्रभावित किया।
हालांकि, वैश्विक कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने भारतीय रुपये को एक विधिक सीमा तक सहारा देने का कूटनीतिक प्रयास किया। लंदन का ब्रेंट क्रूड वायदा (Brent Crude) अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब डेढ़ फीसदी की गिरावट के साथ 72 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जो पिछले चार महीनों का इसका सबसे न्यूनतम विलेख स्तर है। कच्चे तेल के आयात बिल में कमी आने की संभावना के बावजूद घरेलू बाजार से विदेशी पूंजी की कड़क निकासी ने रुपये की रिकवरी के लॉजिस्टिक्स को सीमित कर दिया और बाजार बंद होने तक रुपया दबाव से उबर नहीं पाया।