भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग सेक्टर पर विदेशी निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत होता जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण भारतीय बैंकों द्वारा अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुटाई गई बड़ी पूंजी है। वर्ष 2026 में अब तक भारतीय बैंकों ने विदेशी बाजारों से करीब 12 अरब डॉलर जुटाए हैं। यह आंकड़ा भारतीय बैंकिंग व्यवस्था की मजबूत वित्तीय स्थिति और वैश्विक निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
विदेशी बाजार में भारतीय बैंकों की बढ़ती मांग
2026 में अब तक भारत से कुल करीब 17 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज जुटाया गया है। इसमें लगभग 12 अरब डॉलर की हिस्सेदारी अकेले भारतीय बैंकों की है, जबकि बाकी रकम अन्य कॉर्पोरेट कंपनियों ने जुटाई है। यदि विदेशी बाजार से फंड जुटाने की यही रफ्तार जारी रहती है, तो भारत 2021 में दर्ज करीब 22 अरब डॉलर के रिकॉर्ड के करीब पहुंच सकता है।
हाल के दिनों में भारतीय बैंकों की विदेशी बॉन्ड बाजार में गतिविधियां काफी तेज रही हैं। आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, एचडीएफसी बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे प्रमुख बैंकों ने मिलकर करीब 4.4 अरब डॉलर की पूंजी जुटाई है। विदेशी निवेशकों की ओर से इन बॉन्ड में दिखाई जा रही मांग बताती है कि भारतीय बैंकों की क्रेडिट क्वालिटी और वित्तीय मजबूती पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का भरोसा बढ़ा है।
RBI की विशेष योजना बनी बड़ा कारण
भारतीय बैंकों की इस तेजी के पीछे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की वन-टाइम स्वैप सुविधा को भी अहम वजह माना जा रहा है। विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक यानी FCNR-B जमा से जुड़ी इस सुविधा के तहत तय समयसीमा तक बुक किए गए डिपॉजिट पर स्वैप सपोर्ट का लाभ मिलता है।
5 जून को इस विशेष योजना की घोषणा के बाद बैंकों ने विदेशी फंड जुटाने की गतिविधियां तेज कर दीं। आंकड़ों के अनुसार, 2026 में बैंकों द्वारा जुटाए गए करीब 12 अरब डॉलर में से लगभग 10 अरब डॉलर की रकम RBI की घोषणा के बाद जुटाई गई। इससे साफ है कि केंद्रीय बैंक की नीति ने बैंकों को विदेशी मुद्रा बाजार से पूंजी जुटाने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया।
HDFC Bank ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड
विदेशी बाजार से फंड जुटाने की इस दौड़ में HDFC Bank सबसे आगे रहा है। बैंक ने हाल ही में 1.75 अरब डॉलर का बॉन्ड इश्यू जारी किया, जिसे किसी भारतीय बैंक का अब तक का सबसे बड़ा विदेशी बॉन्ड इश्यू बताया जा रहा है। इससे पहले जून में भी बैंक ने 750 मिलियन डॉलर जुटाए थे।
बैंक के अनुसार, जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल ग्राहकों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ विदेशों में मौजूद ग्राहकों की फंडिंग जरूरतों के लिए किया जा सकता है। इतनी बड़ी रकम जुटाना भारतीय बैंकिंग सिस्टम की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के भरोसे का महत्वपूर्ण संकेत है।
कुल मिलाकर, भारतीय बैंकों की विदेशी बाजार में बढ़ती पकड़ देश की मजबूत आर्थिक बुनियाद, बेहतर बैंकिंग साख और वैश्विक निवेशकों के विश्वास को दर्शाती है। अगर यह रफ्तार आगे भी बनी रहती है, तो भारतीय बैंक न केवल रिकॉर्ड विदेशी पूंजी जुटा सकते हैं, बल्कि देश में कर्ज और वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता को भी मजबूत कर सकते हैं।