हालांकि, मंजूरी मिलने का यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि आगामी कुछ महीनों के भीतर ही इन सभी स्कूलों में कक्षाएं संचालित होने लगेंगी। केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) की नियमावली के अनुसार, किसी भी नए स्कूल को पूरी तरह क्रियाशील होने में एक लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस रोडमैप का सबसे पहला और अनिवार्य चरण है—जमीन का आवंटन। इसके लिए राज्य सरकार और जिला प्रशासन को मुफ्त में उपयुक्त भूमि केंद्रीय विद्यालय संगठन को हस्तांतरित करनी होती है।
जिन जिलों में जिला प्रशासन द्वारा जमीन चिह्नित कर केवीएस को सौंप दी गई है, वहां अस्थायी भवनों में जल्द ही प्राथमिक कक्षाएं (कक्षा 1 से 5 तक) शुरू की जा सकती हैं। लेकिन जिन जिलों में भूमि अधिग्रहण या तकनीकी कारणों से जमीन मिलने में देरी हो रही है, वहां के बच्चों को दाखिले के लिए अभी 2 से 3 साल का लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। जमीन मिलने के बाद केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा स्थाई स्कूल भवन, खेल का मैदान और स्टाफ क्वार्टर के निर्माण की रूपरेखा तैयार की जाती है, जो इस पूरी प्रक्रिया का सबसे समय लेने वाला चरण होता है। नए केवी खुलने से न सिर्फ शिक्षा का स्तर सुधरेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।