भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) के पास सीमा सुरक्षा बल (BSF) और पंजाब पुलिस के एक अत्यंत संवेदनशील तथा कूटनीतिक संयुक्त अभियान में अत्याधुनिक हथियारों की एक बहुत बड़ी खेप बरामद की गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा दी गई आधिकारिक विधिक जानकारी के अनुसार, खुफिया इनपुट के आधार पर की गई इस विखंडन घेराबंदी के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने एक संदिग्ध मुख्य आरोपी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। सुरक्षा बलों ने पकड़े गए तस्कर के पास से घातक एके-47 (AK-47) राइफल समेत कुल 26 अत्याधुनिक और प्रतिबंधित विदेशी हथियार बरामद किए हैं, जिसका इस्तेमाल राज्य की आंतरिक सुरक्षा और कूटनीतिक शांति को विलेख रूप से भंग करने के लिए किया जाना था।
पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव ने शुक्रवार को इस पूरे मामले का आधिकारिक कूटनीतिक खुलासा करते हुए बताया कि सुरक्षा एजेंसियों की शुरुआती विधिक पूछताछ और फॉरेंसिक जांच में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल सामने आया है। गिरफ्तार किया गया आरोपी भारत में रहकर सीधे ऑस्ट्रेलिया (Australia) में बैठे अपने एक शीर्ष कूटनीतिक सहयोगी और हैंडलर के इशारे पर काम कर रहा था। पुलिस जांच में यह तथ्य उजागर हुआ है कि विदेश में मौजूद इस मास्टरमाइंड ने अत्यधिक सुरक्षित सोशल मीडिया एप्लीकेशन के जरिए हथियारों की सटीक 'ड्रॉप लोकेशन' (Drop Location) और जीपीएस कोऑर्डिनेट्स साझा किए थे। आरोपी का मुख्य कूटनीतिक काम सीमा पार से ड्रोन या अन्य माध्यमों से गिराई गई हथियारों की इस बड़ी विखंडन खेप को सुरक्षित रूप से कलेक्ट कर आगे गैंगस्टरों या असामाजिक तत्वों तक पहुंचाना था।
अंतरराष्ट्रीय सीमा के समीप से रोहन खोसला की गिरफ्तारी
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संयुक्त स्ट्राइक: सुरक्षा बलों से मिली आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, बीएसएफ पंजाब और पंजाब पुलिस की 'स्टेट स्पेशल ऑपरेशंस सेल' (SSOC) अमृतसर ने खुफिया इनपुट मिलते ही अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास अपनी विखंडन रणनीतिक तैनाती बढ़ा दी थी।
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मुख्य सरगना काबू: इस संयुक्त विधिक कार्रवाई के दौरान अमृतसर की रूपनगर कॉलोनी के रहने वाले रोहन खोसला नामक मुख्य आरोपी को अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा के बिल्कुल नजदीक से कूटनीतिक घेराबंदी कर दबोच लिया गया।
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जांच का बढ़ता दायरा: पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (UAPA) की सख्त विधिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है, और अब ऑस्ट्रेलिया में बैठे हैंडलर के प्रत्यर्पण (Extradition) व उसके वित्तीय कूटनीतिक नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों की मदद ली जा रही है।