रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को फिर से बंद करने की कड़े विखंडन चेतावनी के बाद, शुक्रवार को इजराइल और हिज्बुल्लाह आधिकारिक रूप से सीजफायर (संघर्ष विराम) पर राजी हो गए हैं। इजराइल-लेबनान सीमा पर हफ्तों से जारी खूनी सैन्य संघर्ष को रोकने की दिशा में यह अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कूटनीतिक कोशिश मानी जा रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से विलेख पुष्टि की है कि यह संघर्ष विराम शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार शाम 4 बजे से प्रभावी हो गया है। इस ऐतिहासिक समझौते को अमलीजामा पहनाने में यूनाइटेड स्टेट्स (US), कतर और ईरान ने पर्दे के पीछे से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विधिक मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।
यह कूटनीतिक समझौता इसलिए भी अप्रत्याशित माना जा रहा है क्योंकि गुरुवार को ही इजराइली सेना और हिज्बुल्लाह के लड़ाकों के बीच सीमा पर भारी गोलीबारी और विखंडन रॉकेट हमले दर्ज किए गए थे। हाल के दिनों में दक्षिणी लेबनान में इजराइल के आक्रामक मिलिट्री ऑपरेशन और हिज्बुल्लाह के जवाबी हमलों में कई इजराइली सैनिकों के मारे जाने के बाद क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया था। लेबनानी प्रशासन ने इजराइल पर शांति वार्ता को पटरी से उतारने का विधिक आरोप लगाया था, जबकि इजराइली नेतृत्व का कड़ा रुख था कि उत्तरी इजराइल के नागरिक समुदायों को सुरक्षित करने के लिए हिज्बुल्लाह के बुनियादी ढांचे को विलेख रूप से नेस्तनाबूद करना उनकी संप्रभुता के लिए आवश्यक है।
अमेरिका-ईरान की बड़ी शांति वार्ता से जुड़े कूटनीतिक तार
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ईरान का कड़ा कूटनीतिक रुख: हिज्बुल्लाह के एक वरिष्ठ सांसद ने रॉयटर्स को एक बड़ा कूटनीतिक खुलासा करते हुए बताया कि ईरान ने हिज्बुल्लाह नेतृत्व को स्पष्ट संदेश दिया था कि वॉशिंगटन (अमेरिका) के साथ तेहरान की जो बड़ी परमाणु व प्रतिबंध बहाली वार्ता चल रही है, वह तब तक एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकती जब तक लेबनान में पूरी तरह से विखंडन सैन्य सीजफायर लागू नहीं हो जाता।
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क्षेत्रीय समझ पर कड़ा दबाव: लेबनान की इस भीषण हिंसा ने मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से बनी व्यापक अमेरिकी-ईरान कूटनीतिक समझ और हालिया हस्ताक्षरित 14-पॉइंट्स वाले एमओयू (MoU) पर भारी विधिक दबाव बना दिया था, जिसके चलते दोनों पक्षों को तुरंत हरकत में आना पड़ा।
चुनौतियां और भविष्य की विधिक निगरानी
लागू करने की गंभीर चुनौती: यद्यपि इस सीजफायर की घोषणा से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों और वैश्विक भू-राजनीति ने कूटनीतिक रूप से राहत की सांस ली है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय जानकारों ने कड़ी चेतावनी दी है। अतीत में इजराइल और हिज्बुल्लाह के बीच हुए कई संघर्ष विराम समझौतों का बार-बार विखंडन उल्लंघन हुआ है। इसलिए आने वाले 60 दिनों के भीतर इस जमीनी समझौते को पूरी सख्ती से लागू करना और संयुक्त राष्ट्र (UN) व मध्यस्थ देशों द्वारा इसकी चौबीसों घंटे विधिक मॉनिटरिंग करना इस क्षेत्र में स्थायी शांति की स्थापना के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।