बनारस न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश के आदमपुर में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब मुंबई एटीएस और आईबी की संयुक्त टीम ने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. आरिफ अंसारी के आवास पर धावा बोल दिया। सुरक्षा एजेंसियों की इस कार्रवाई का मुख्य केंद्र डॉक्टर का बेटा, अबू बकर था, जिससे लगातार नौ घंटों तक पूछताछ की गई। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि नीट की तैयारी कर रहा अबू बकर सोशल मीडिया के जरिए किसी कश्मीरी हैंडलर और पाकिस्तान के कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क में था।
सुबह 10 बजे शुरू हुई यह छापेमारी बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दी गई। अधिकारियों ने डॉ. आरिफ के नवापुरा स्थित अस्पताल और उनके ओंकारेश्वर स्थित पुश्तैनी मकान, दोनों जगहों पर गहनता से जांच की। इस दौरान अबू बकर के लैपटॉप, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया गया। शाम सात बजे जब टीम रवाना हुई, तो वह अपने साथ जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य और डिजिटल उपकरण ले गई।
इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ लोग इसे हाल ही में लखनऊ से पकड़े गए संदिग्ध आतंकियों और टेरर फंडिंग के तार से जोड़कर देख रहे हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी किसी की पुष्टि नहीं की गई है। पुलिस की भूमिका केवल बाहरी सुरक्षा और नाकाबंदी तक ही सीमित रही, जबकि मुख्य जांच और पूछताछ एटीएस व आईबी के विशेषज्ञों ने बंद कमरों में की।
डॉ. आरिफ के भाइयों का साड़ियों का बड़ा कारोबार है और उनके व्यापारिक संबंध कई शहरों से जुड़े हैं, जिसे देखते हुए जांच एजेंसियां बैंक खातों और लेन-देन के विवरणों की भी बारीकी से पड़ताल कर रही हैं। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां अबू बकर के व्हाट्सएप चैट्स और विदेशी संपर्कों के पीछे की असली मंशा को डिकोड करने में जुटी हैं। इस कार्रवाई ने सीमा पार से होने वाले डिजिटल संपर्क और युवाओं के रेडिकलाइजेशन के खतरों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।