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नमो बनारस केंद्र पर बुनकरों के तीखे सवाल: बोले— 'हमें दुकान नहीं, सूरत की नकल से सुरक्षा और अपना बाजार चाहिए'

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Posted On:Thursday, April 16, 2026

बनारस न्यूज डेस्क:वाराणसी के बुनकरों और साड़ी व्यवसायियों ने नगर निगम की प्रस्तावित 'नमो: बनारस केंद्र' योजना पर असंतोष व्यक्त करते हुए अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं। बुनकर संघों का तर्क है कि काशी में पहले से ही 'ट्रेड फैसिलिटी सेंटर' जैसे बुनियादी ढांचे मौजूद हैं, जिनका अपेक्षित लाभ जमीनी स्तर पर काम करने वाले कारीगरों को नहीं मिल सका है। उनके अनुसार, बुनकरों को नए शोरूम या दुकानों की भौतिक संरचनाओं के बजाय एक ऐसे बाजार तंत्र की आवश्यकता है जो उनके पारंपरिक हुनर को बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कर सके और सीधे खरीदारों तक पहुंचा सके।

​बुनकर बिरादरी की सबसे बड़ी चिंता सूरत से आने वाली मशीनी साड़ियों की 'डुप्लीकेसी' है, जो बनारसी साड़ियों के पेटेंट और विशिष्ट पहचान को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। वाराणसी बुनकर एसोसिएशन का आरोप है कि सूरत के व्यापारी बनारसी डिजाइनों की हूबहू नकल कर सस्ते दाम पर माल बाजार में उतार रहे हैं, जिससे असली हथकरघा उत्पादों की मांग घट रही है। बुनकरों ने मांग की है कि जिस तरह असम में स्थानीय उत्पादों की सुरक्षा के लिए कठोर नियम बनाए गए हैं, वैसे ही उत्तर प्रदेश में भी बनारसी साड़ी के नाम पर नकली माल बेचने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज होने चाहिए।

​आर्थिक तंगी और तकनीक के अभाव के कारण बनारस के कुशल बुनकर अब गुजरात के सूरत की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सूरत में आधुनिक हाई-स्पीड मशीनों और सरकारी रियायतों के कारण उत्पादन लागत बहुत कम है, जबकि बनारस का पारंपरिक बुनकर पुरानी मशीनों पर घंटों मेहनत के बाद भी प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहा है। बुनकरों का मानना है कि यदि सरकार उन्हें आधुनिक तकनीक और बिजली की रियायती दरों जैसी सुविधाएं प्रदान करे, तो इस ऐतिहासिक उद्योग को पलायन और पतन से बचाया जा सकता है।

​बुनकर नेताओं ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से अपील की है कि वे जीआई (GI) टैग के नियमों को कड़ाई से लागू करें ताकि असली बनारसी साड़ी की पहचान सुनिश्चित हो सके। उनका सुझाव है कि सरकार को 'यूपीका' जैसी पुरानी व्यवस्थाओं को पुनर्जीवित कर सीधे बुनकरों से खरीद शुरू करनी चाहिए। 'नमो: बनारस केंद्र' जैसे नए निर्माणों के बजाय, यदि सरकार मौजूदा बुनकर बस्तियों में बुनियादी सुविधाएं सुधारे और स्थानीय स्तर पर व्यापारिक केंद्र विकसित करे, तो ही काशी के इस प्राचीन गौरव को वैश्विक बाजार में फिर से मजबूती से स्थापित किया जा सकेगा।


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