बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी में जमीन के विवाद को लेकर सतीश कुमार जायसवाल की हत्या के मामले में अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट नंबर-3 प्रज्ञा सिंह की अदालत ने शिवआसरे और अजीत कुमार जायसवाल को उम्रकैद की सजा दी। दोनों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। वहीं, राजेंद्र जायसवाल, कृष्णआसरे और संतोष पटेल को भी अलग-अलग धाराओं में कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
2016 में जमीन के विवाद में हुई थी मारपीट
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 15 नवंबर 2016 को सुबह करीब 10:30 बजे बड़ागांव थाना क्षेत्र के चकखरावन, खरगपुर गांव में जमीन के विवाद और पुराने मुकदमे को लेकर मारपीट हुई थी। आरोप था कि अजीत, राजेंद्र, संतोष पटेल, शिवआसरे और कृष्णआसरे लाठी-डंडे, गैंता और फावड़ा लेकर सतीश के पट्टीदार की जमीन पर पहुंचे थे। इस दौरान सतीश के साथ मारपीट की गई। बीच-बचाव करने आए संदीप, रामप्रवेश और विकास कुमार समेत अन्य लोग भी घायल हो गए।
गंभीर रूप से घायल सतीश को पहले हरहुआ के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया।
दो दोषियों को हत्या के मामले में उम्रकैद
अदालत ने शिवआसरे और अजीत कुमार जायसवाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों को धारा 148 के तहत दो-दो साल का कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना नहीं भरने पर उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। राजेंद्र जायसवाल, कृष्णआसरे और संतोष पटेल को भी अन्य धाराओं के तहत सजा दी गई है। अदालत ने निर्देश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
जुर्माने की 80 फीसदी रकम मृतक के परिवार को मिलेगी
अदालत ने आदेश दिया कि दोषियों से वसूले गए जुर्माने की 80 प्रतिशत राशि सतीश कुमार जायसवाल के आश्रित या कानूनी प्रतिनिधि को मुआवजे के तौर पर दी जाए। फैसला सुनाए जाने के बाद पांचों दोषियों को जिला कारागार भेजने का आदेश दिया गया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी ओंकारनाथ तिवारी ने पैरवी की।
उम्र और परिवार की जिम्मेदारी का दिया हवाला
सजा पर सुनवाई के दौरान राजेंद्र जायसवाल की ओर से उनकी उम्र करीब 75 साल होने का हवाला देते हुए कम सजा देने की अपील की गई। वहीं, दो अन्य दोषियों की ओर से परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी का तर्क रखा गया। हालांकि, अदालत ने अपराध की गंभीरता, उपलब्ध सबूतों और गवाहों के आधार पर सजा सुनाई।