बनारस न्यूज डेस्क: कई बार असफलता ही सबसे बड़ी सीख बनती है—और इसका बेहतरीन उदाहरण हैं रिया सैनी। शुरुआती कोशिशों में UPSC सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन का प्रीलिम्स तक पार न कर पाने वाली रिया ने हार मानने के बजाय अपनी तैयारी का तरीका पूरी तरह बदल दिया। इसी बदलाव और लगातार मेहनत ने उन्हें तीसरे प्रयास में देशभर में 22वीं रैंक दिलाई और अब वह IAS अधिकारी बन चुकी हैं।
उत्तर प्रदेश कैडर मिलने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग वाराणसी में हुई है, जो नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र भी है। उनके साथ 2025 बैच के अन्य युवा अधिकारी भी अलग-अलग जिलों में तैनात किए गए हैं, जिससे प्रशासन में नई ऊर्जा देखने को मिलेगी।
रिया का सफर शुरुआत से ही अनुशासन और स्पष्ट लक्ष्य का रहा। दिल्ली में जन्मी और मुजफ्फरनगर से जुड़ी रिया पढ़ाई में हमेशा आगे रहीं। इंजीनियरिंग के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें सिविल सेवा में जाना है, इसलिए उन्होंने प्लेसमेंट का रास्ता नहीं चुना।
उनकी तैयारी का सबसे खास पहलू था—कम संसाधन, लेकिन मजबूत पकड़। उन्होंने सीमित किताबों को बार-बार दोहराया और बेसिक्स को मजबूत किया। करंट अफेयर्स के लिए नियमित पढ़ाई और मॉक टेस्ट के जरिए खुद को परखना उनकी रणनीति का हिस्सा रहा।
मेंस परीक्षा के लिए उन्होंने लिखने की प्रैक्टिस को अहम माना। उनके अनुसार, साफ भाषा, संतुलित उत्तर और उदाहरणों के साथ प्रस्तुति ही अच्छे अंक दिलाती है। रोजाना 7–8 घंटे की पढ़ाई और सेल्फ स्टडी पर भरोसा उनकी सफलता का असली आधार बना।
रिया सैनी की कहानी यह साबित करती है कि असफलता अंत नहीं होती, बल्कि सही दिशा में दोबारा शुरुआत करने का मौका देती है। आज उनकी सफलता उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो संघर्ष के बावजूद अपने सपनों को जिंदा रखते हैं।