'सिचुएशनशिप' (Situationship) और 'बेंचिंग' (Benching) के बाद आधुनिक डेटिंग संस्कृति में एक नया शब्द तेजी से उभरा है—'मेबीलेटरशिप' (Maybelatership)। यह आधुनिक डेटिंग का एक ऐसा अस्पष्ट दौर है जहां दो लोग एक-दूसरे को पसंद तो करते हैं, लेकिन रिश्ते को आगे बढ़ाने या कोई आधिकारिक नाम देने के बजाय उसे अनिश्चितकाल के लिए "शायद बाद में" (Maybe later) पर टाल देते हैं।
क्या है 'Maybelatership'?
- न पूरी तरह इन, न पूरी तरह आउट: इसमें दो लोग नियमित रूप से बातचीत करते हैं, साथ वक्त बिताते हैं और एक भावनात्मक जुड़ाव भी महसूस करते हैं। लेकिन जब कमिटमेंट या भविष्य की बात आती है, तो "अभी सही वक्त नहीं है" या "बाद में देखेंगे" कहकर फैसले को आगे खिसका दिया जाता है।
- विकल्प खुला रखने की आदत: डेटिंग विशेषज्ञों का मानना है कि डेटिंग ऐप्स के दौर में लोगों के पास असीमित विकल्प मौजूद हैं। इसी कारण लोग किसी एक व्यक्ति के साथ पूरी तरह जुड़ने से कतराते हैं और बैकअप विकल्प के तौर पर रिश्ते को अधर में लटकाए रखते हैं।
क्यों पनप रहा है यह ट्रेंड?
- FOMO और प्रतिबद्धता का डर: बेहतर साथी खोने का डर (FOMO) और किसी गंभीर रिश्ते में बंधने की झिझक युवाओं को पूरी तरह समर्पित होने से रोकती है।
- करियर और निजी प्राथमिकताएं: कई युवा अपने करियर, पढ़ाई या व्यक्तिगत लक्ष्यों को प्राथमिकता देना चाहते हैं, जिसके चलते वे रिश्ते के सुख-सुविधाओं का आनंद तो लेना चाहते हैं लेकिन उसकी जिम्मेदारियां उठाने से बचते हैं।
- अकेलेपन से बचाव: किसी को पूरी तरह मना न करके अपने करीब बनाए रखने से अकेलेपन का अहसास कम होता है, हालांकि यह स्थिति दूसरे साथी के लिए मानसिक रूप से थकाऊ हो सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य पर असर
रिलेशनशिप काउंसलर्स का कहना है कि 'मेबीलेटरशिप' में रहने वाला दूसरा व्यक्ति अक्सर अत्यधिक मानसिक तनाव, भ्रम और आत्म-संदेह से जूझता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि रिश्ते में अपनी अपेक्षाओं को लेकर स्पष्ट बातचीत करना, अपनी सीमाएं तय करना और अनिश्चित इंतजार के बजाय समय रहते खुद को प्राथमिकता देना जरूरी है।