सुप्रीम कोर्ट ने देश में मैनुअल स्कैवेंजिंग यानी हाथ से सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के मामलों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश समेत 15 राज्यों के मुख्य सचिवों को अवमानना नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से जवाब मांगा है कि स्पष्ट आदेशों के बावजूद सीवर और सेप्टिक टैंक में लोगों की मौतें क्यों जारी हैं।
अदालत ने कहा कि अब केवल निर्देश जारी करने का समय नहीं है, बल्कि इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से यह बताने को कहा है कि 2023 के आदेशों को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए और इसके बावजूद सफाई कर्मचारियों की मौतें क्यों नहीं रुक रही हैं।
2023 में सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे सख्त निर्देश
20 अक्टूबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने मैनुअल स्कैवेंजिंग को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे।
अदालत ने कहा था कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिसमें किसी भी व्यक्ति को सीवर या सेप्टिक टैंक के अंदर उतरने की जरूरत न पड़े। इसके लिए मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने, सफाई कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने और नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाली मौतों के मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए। पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने और सुरक्षा मानकों को लागू करने पर भी जोर दिया गया था।
सीवर सफाई के दौरान मौतों पर चिंता
मैनुअल स्कैवेंजिंग भारत में लंबे समय से गंभीर सामाजिक और मानवीय मुद्दा रहा है। कई बार सफाई कर्मचारी बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के सीवर और सेप्टिक टैंक में उतरते हैं, जिससे जहरीली गैसों के संपर्क में आने के कारण उनकी मौत हो जाती है।
कानून के तहत हाथ से मैला उठाने और असुरक्षित तरीके से सीवर सफाई पर रोक है, लेकिन कई जगहों पर नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
राज्यों से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने जिन राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस भेजा है, उनसे यह पूछा गया है कि अदालत के आदेशों के पालन के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। साथ ही यह भी पूछा गया है कि सीवर सफाई के दौरान होने वाली मौतों को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई।
अदालत का रुख यह संकेत देता है कि अब केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जमीन पर उनके प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी तय करनी होगी।
तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि सीवर सफाई में आधुनिक मशीनों और रोबोटिक तकनीक के इस्तेमाल से मानव जीवन को खतरे में डालने वाली परिस्थितियों को कम किया जा सकता है। इसके अलावा सफाई कर्मचारियों को प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और बेहतर कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट की यह कार्रवाई एक बार फिर इस बात पर ध्यान केंद्रित करती है कि विकास और स्वच्छता व्यवस्था के साथ-साथ सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।