नागपुर। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत सामने आई जानकारी ने महाराष्ट्र पुलिस बल में मानव संसाधनों की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार राज्य पुलिस में करीब 20 हजार पद रिक्त हैं, जिनमें पुलिस उपनिरीक्षक (PSI), कांस्टेबल और वरिष्ठ अधिकारियों के कई पद शामिल हैं। सामाजिक संगठन एसोसिएशन ऑफ सोशल एंड आरटीआई एक्टिविस्ट्स (ASRA) का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में रिक्तियां होने से पुलिस व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और कानून-व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार पुलिस उपनिरीक्षक स्तर पर हजारों पद खाली हैं, जबकि कांस्टेबलों की भी बड़ी कमी बनी हुई है। इसके अलावा वरिष्ठ अधिकारियों के कई पद भी लंबे समय से रिक्त बताए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त अधिकारियों की अनुपलब्धता का सीधा असर अपराधों की जांच, चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया और मामलों के समय पर निपटारे पर पड़ सकता है।
पुलिस बल में कर्मियों की कमी के कारण मौजूदा कर्मचारियों पर काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है। कई पुलिसकर्मियों को लंबी ड्यूटी करनी पड़ रही है और त्योहारों, वीआईपी सुरक्षा, राजनीतिक कार्यक्रमों तथा कानून-व्यवस्था की विशेष ड्यूटी के कारण नियमित गश्त भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इससे आम नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक समय में साइबर अपराध, संगठित अपराध और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए पुलिस बल को पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षित मानवबल उपलब्ध कराना बेहद आवश्यक है। यदि रिक्त पद लंबे समय तक नहीं भरे जाते, तो भविष्य में पुलिसिंग की दक्षता और न्यायिक प्रक्रिया दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
एसोसिएशन ऑफ सोशल एंड आरटीआई एक्टिविस्ट्स ने राज्य सरकार से सभी रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि महाराष्ट्र जैसे बड़े और औद्योगिक राज्य में जनसंख्या के अनुपात में पुलिस बल को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। वहीं, प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर भर्ती, आधुनिक प्रशिक्षण और तकनीकी संसाधनों के विस्तार से पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है और नागरिकों को बेहतर सुरक्षा उपलब्ध कराई जा सकती है।