देशभर में पेपर लीक (Paper Leak) और प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली को लेकर छात्रों और युवाओं का विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर पर लगातार जारी है. हालांकि, इस आंदोलन को एक बड़ी दिशा तब मिली जब प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने सरकार द्वारा सख्त कार्रवाई के आश्वासन के बाद अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया.
सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल खत्म करने से पहले खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने इस संवेदनशील मुद्दे की कमान संभाली और पिछले 24 घंटों में दो स्पष्ट संदेशों के जरिए यह साफ कर दिया कि सरकार देश के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी.
पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: संसद में पेश होगा सख्त बिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात जारी किए गए लगभग 3 मिनट के अपने वीडियो संदेश में देश के युवाओं और परीक्षार्थियों को संबोधित करते हुए महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:
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संसद में नया विधेयक: प्रधानमंत्री ने ऐलान किया कि सरकार पेपर लीक और परीक्षाओं में अनियमितताओं को रोकने के लिए अगले हफ्ते संसद में एक अत्यंत कड़ा बिल पेश करने जा रही है.
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केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक: प्रस्तावित बिल के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने के लिए केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में विस्तृत चर्चा की जाएगी, ताकि मंत्रियों के सुझावों को शामिल कर इसे सर्वसमावेशी बनाया जा सके.
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कड़े प्रावधान: पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि नए कानून में पेपर लीक सिंडिकेट्स, भूमाफिया और दोषियों के लिए बेहद सख्त सजा और भारी जुर्माने के प्रावधान होंगे.
फास्ट-ट्रैक कोर्ट और पारदर्शिता पर जोर
सरकार की कोशिश है कि इस कानून के जरिए न केवल दोषियों में खौफ पैदा किया जाए, बल्कि जांच प्रक्रिया को भी गति दी जाए:
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त्वरित न्याय (Fast-Track Courts): पेपर लीक और नकल से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों (Fast-Track Courts) के गठन का प्रस्ताव है, जिससे महीनों तक लटकने वाले मुकदमों का जल्द से जल्द निपटारा हो सके.
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संस्थागत जवाबदेही: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और अन्य परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं के कामकाज में पारदर्शिता और तकनीकी सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं.
छात्रों के भरोसे को बहाल करने की कोशिश
जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री के इस सीधे हस्तक्षेप और सोनम वांगचुक द्वारा अनशन वापस लेने को एक सकारात्मक दिशा के रूप में देखा जा रहा है. अब पूरे देश की नजरें संसद के आगामी सत्र पर टिकी हैं, जहां इस कानून को पारित कराने की तैयारी है.