भारत में बढ़ता वाहन प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) की एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण की वजह से भारत में हर साल करीब 90 हजार लोगों की असमय मौत हो जाती है। इसके अलावा लगभग 15,300 बच्चों में हर साल अस्थमा के नए मामले सामने आते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, वाहन प्रदूषण का असर इतना गंभीर है कि औसतन हर छह मिनट में एक व्यक्ति की जान जा रही है, जबकि करीब हर 34 मिनट में एक बच्चा अस्थमा का शिकार हो रहा है। हालांकि, रिपोर्ट में एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया है। अगर भारत तेजी से जीरो-एमिशन वाहनों (Zero-Emission Vehicles) की ओर बढ़ता है, तो वर्ष 2050 तक करीब 17 लाख असमय मौतों को रोका जा सकता है।
जीरो-एमिशन ट्रांसपोर्ट से मिल सकता है बड़ा फायदा
ICCT की रिपोर्ट “Health benefits of zero-emission transport through 2050” में एक संभावित मॉडल तैयार किया गया है। इसमें अनुमान लगाया गया है कि अगर वर्ष 2045 तक बिकने वाले सभी नए वाहन जीरो-एमिशन श्रेणी के हो जाएं, तो वायु प्रदूषण में भारी कमी आ सकती है।
इस मॉडल में हवा की गुणवत्ता, स्वास्थ्य पर असर, असमय मौतों और बच्चों में अस्थमा के मामलों का आकलन किया गया। रिपोर्ट बताती है कि इलेक्ट्रिक और अन्य स्वच्छ ऊर्जा आधारित वाहनों को बढ़ावा देने से प्रदूषण के कारण होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
दुनिया में वाहन प्रदूषण का बड़ा भार भारत पर
रिपोर्ट के मुताबिक, वाहन उत्सर्जन से जुड़ी दुनिया भर की असमय मौतों में भारत की हिस्सेदारी करीब 13 प्रतिशत है। यह आंकड़ा दिखाता है कि भारत में परिवहन क्षेत्र से होने वाला प्रदूषण वैश्विक स्तर पर एक बड़ी समस्या बन चुका है।
देश में तेजी से बढ़ती आबादी, शहरीकरण और वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि ने इस चुनौती को और बढ़ा दिया है। खासतौर पर बड़े शहरों में ट्रैफिक का दबाव, पुराने वाहन और ईंधन से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।
बच्चों पर भी पड़ रहा गंभीर असर
वाहन प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कण और जहरीली गैसें बच्चों के स्वास्थ्य पर खास प्रभाव डालती हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदूषित हवा के लंबे समय तक संपर्क में रहने से बच्चों में अस्थमा और सांस से जुड़ी अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
बच्चों के फेफड़े विकास की प्रक्रिया में होते हैं, इसलिए वायु प्रदूषण का असर उनके स्वास्थ्य पर लंबे समय तक रह सकता है।
भारत के लिए क्यों जरूरी है स्वच्छ परिवहन?
भारत सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि बिजली उत्पादन में स्वच्छ ऊर्जा का हिस्सा बढ़ाना, सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना और पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाना भी जरूरी है।
ICCT की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि स्वच्छ परिवहन व्यवस्था अपनाने से न केवल पर्यावरण को फायदा होगा, बल्कि लाखों लोगों की जिंदगी भी बचाई जा सकती है।