भारत में स्ट्रीट आर्ट और भित्तिचित्र (Murals) अब सिर्फ दीवारों की सजावट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये सामाजिक संवाद, संस्कृति और स्थानीय पहचान को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम बन चुके हैं। देश के कई शहरों की पुरानी गलियों और फीकी कंक्रीट की दीवारों को जीवंत ओपन-एयर आर्ट गैलरी में तब्दील कर दिया गया है। अगर आप कला और फोटोग्राफी के शौकीन हैं, तो भारत के ये 5 स्ट्रीट आर्ट ठिकाने देखने लायक हैं:
भारत के 5 प्रमुख स्ट्रीट आर्ट गंतव्य
लोधी आर्ट डिस्ट्रिक्ट, नई दिल्ली:
देश का पहला आधिकारिक पब्लिक आर्ट डिस्ट्रिक्ट, जहां देशी और विदेशी कलाकारों ने सरकारी आवासीय क्वार्टरों की दीवारों को कैनवस बना दिया है। यहां प्रकृति, पर्यावरण और सामाजिक संदेशों को दर्शाते विशालकाय भित्तिचित्र पैदल टहलते हुए देखे जा सकते हैं।
बांद्रा और ससून डॉक्स, मुंबई:
मुंबई का बांद्रा इलाका बॉलीवुड के विंटेज पोस्टर्स, संगीत और समकालीन पॉप कल्चर से सजी गलियों के लिए मशहूर है। वहीं ससून डॉक्स पर स्ट+आर्ट इंडिया फाउंडेशन (St+art India) द्वारा बनाए गए चित्र मछुआरा समुदाय की जीवनशैली और समुद्र की विविधता को खूबसूरती से पेश करते हैं।
फोर्ट कोच्चि, केरल:
'कोच्चि-मुज़िरिस बिनाले' (Kochi-Muziris Biennale) के लिए विख्यात फोर्ट कोच्चि की ऐतिहासिक औपनिवेशिक इमारतों और संकरी गलियों में औपनिवेशिक इतिहास, मसालों के व्यापार और राजनीतिक विचारों को बयां करती कलाकृतियां हर मोड़ पर दिखाई देती हैं।
मल्लिकाटे और धानमंडी, बेंगलुरु:
'गार्डन सिटी' की दीवारों पर टेक हब की आधुनिकता के साथ-साथ पारंपरिक कन्नड़ संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और लोककथाओं का सुंदर संगम देखने को मिलता है। मल्लेश्वरम की गलियों में बनी पेंटिंग्स स्थानीय विरासत को जीवंत करती हैं।
व्हाइट टाउन, पुडुचेरी:
फ्रेंच क्वार्टर की पीली और पेस्टल रंग की दीवारों पर बनी मिनिमलिस्ट और क्लासिक फ्रेंच-तमिल संगम वाली कलाकृतियां इस तटीय शहर के आकर्षण को और बढ़ा देती हैं।
क्यों खास है यह अनुभव?
म्यूजियम की बंद दीवारों से बाहर निकलकर यह कला सीधे आम लोगों, पर्यटकों और राहगीरों से जुड़ती है। यह न सिर्फ शहरों के कायाकल्प में मदद कर रही है, बल्कि सांस्कृतिक पर्यटन और स्थानीय कलाकारों के लिए एक बड़ा मंच भी साबित हो रही है।