बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी में गंगा का जलस्तर अब धीरे-धीरे नीचे आने लगा है, लेकिन बाढ़ का असर अभी खत्म नहीं हुआ है। पानी कम होने के बाद घाटों की सीढ़ियों और आसपास मोटी परत में मिट्टी और सिल्ट जम गई है। जगह-जगह गंदगी और फिसलन के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों को परेशानी हो रही है। स्नान और घाटों पर घूमने वाले लोगों को संभलकर चलना पड़ रहा है, क्योंकि फिसलने से हादसे का खतरा बना हुआ है।
घाटों पर जमा सिल्ट ने दुकानदारों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। कई दुकानदार अपने स्तर पर पंप लगाकर पानी और मिट्टी हटाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि घाटों की सफाई की जिम्मेदारी प्रशासन और नगर निगम की है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक रोजाना यहां पहुंचते हैं, लेकिन सफाई नहीं होने से कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। अस्सी घाट पर सुबह-ए-बनारस मंच के आसपास भी पानी उतरने के बाद गंदगी और सिल्ट जमा है। कई दुकानदारों को अपनी दुकानें घाट की जगह सड़क की ओर लगाने की मजबूरी हो गई है।
उधर, मारूति नगर क्षेत्र में जलजमाव से भी लोग परेशान हैं। समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता अमन ने आरोप लगाया कि इलाके के कई हिस्सों में अब भी बाढ़ जैसे हालात हैं। कुछ गलियों में पानी इतना ज्यादा है कि नाव चलाने की स्थिति बनी हुई है और लोगों को राहत सामग्री का इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने नगर निगम से नालों की सफाई कराने और पानी की निकासी की व्यवस्था जल्द ठीक करने की मांग की है।
वाराणसी स्टेशन के आंकड़ों के अनुसार, 7 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे गंगा का जलस्तर 69.6 मीटर दर्ज किया गया, जो 70.262 मीटर के चेतावनी स्तर से नीचे है। इसके बावजूद निचले इलाकों और घाटों पर बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है। करीब 84 घाटों का संपर्क अभी भी टूटा हुआ बताया जा रहा है। मणिकर्णिका घाट के ऊपरी हिस्से में शवदाह जारी है, जबकि हरिश्चंद्र घाट की गलियों में भी मुश्किल हालात के बीच अंतिम संस्कार किए जा रहे हैं। प्रशासन जलस्तर और बाढ़ प्रभावित इलाकों पर लगातार नजर रख रहा है।