रात में देर तक जागना और सुबह देर से सोकर उठना आजकल के लाइफस्टाइल में आम बात बन गई है। देर रात तक जागने वाले (Night Owls) अक्सर मानते हैं कि अगर वे रात 2 बजे सोकर सुबह 10 बजे उठते हैं, तो भी वे 8 घंटे की पूरी नींद ले रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आप कितने घंटे सोते हैं, उतना ही महत्वपूर्ण यह भी है कि आप किस समय सोते हैं।
मुंबई के ग्लेनेगल्स अस्पताल के चेस्ट फिजिशियन और स्लीप डिसऑर्डर विशेषज्ञ डॉ. हरीश चाफले के अनुसार, हमारे शरीर का जैविक चक्र (Circadian Rhythm) पारंपरिक समय पर सोने के लिए बना है। शरीर घड़ी के विपरीत गलत समय पर ली गई नींद सेहत को वह ताजगी और मरम्मत नहीं दे पाती, जिसकी शरीर को जरूरत होती है।
हार्मोनल असंतुलन और भूख पर असर
विशेषज्ञों के मुताबिक, गलत समय पर सोने से शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ने लगता है:
- मेलाटोनिन और कोर्टिसोल का प्रभाव: मेलाटोनिन नींद को नियंत्रित करता है और कोर्टिसोल सुबह उठने व तनाव से निपटने में मदद करता है। देर रात सोने से इन दोनों हार्मोन का चक्र बिगड़ जाता है।
- भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन: देर से सोने-जागने के रूटीन से घ्रेलिन (Ghrelin - भूख बढ़ाने वाला हार्मोन) बढ़ता है, जबकि लेप्टिन (Leptin - पेट भरने का संकेत देने वाला हार्मोन) कम होता है।
- परिणाम: इसके कारण दिनभर मीठा और भारी खाना खाने की इच्छा बढ़ती है, सुस्ती बनी रहती है, और मेटाबॉलिज्म (पाचन दर) धीमा पड़ जाता है। लंबे समय में यह स्थिति वजन बढ़ाने का कारण बन सकती है।
क्या रात 2 से सुबह 10 बजे की नींद हमेशा नुकसानदायक है?
डॉ. चाफले के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति रोजाना इसी निश्चित समय पर बिना किसी रुकावट के 8 घंटे सोता है और उठने पर पूरी तरह तरोताजा महसूस करता है, तो यह समय अवधि उसके लिए पर्याप्त हो सकती है।
लेकिन यदि यह रूटीन उनके दैनिक कामकाज या प्राकृतिक जैविक चक्र से मेल नहीं खाता, तो लंबे समय में यह नींद की गुणवत्ता और समग्र स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। इसलिए अच्छी सेहत के लिए नींद की अवधि (8 घंटे) और समय (जैविक घड़ी के अनुसार) दोनों पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।