भारतीय क्रिकेट में पिछले 25 सालों में खेल का पूरा परिदृश्य बदल चुका है. इन वर्षों में क्रिकेट बड़े मेट्रो शहरों की चकाचौंध से बाहर निकलकर देश के छोटे-छोटे कस्बों और गांवों तक जा पहुंचा है. आज भारतीय टीम और घरेलू क्रिकेट में खेल रहे कई बड़े खिलाड़ी इन्हीं ग्रामीण और मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से आते हैं. खास तौर पर इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की शुरुआत के बाद तो इस मोर्चे पर एक बड़ी क्रांति ही आ गई है. आईपीएल फ्रेंचाइजियों के मजबूत स्काउटिंग सिस्टम ने भारतीय क्रिकेट को कई ऐसे नायाब हीरे दिए हैं, जो शायद सही मंच न मिलने के कारण कहीं छुपे रह जाते.
कुछ ऐसा ही शानदार काम राजस्थान रॉयल्स (RR) की टीम ने किया, जिसने भारतीय क्रिकेट को वैभव सूर्यवंशी जैसा तूफानी और रिकॉर्डतोड़ बल्लेबाज दिया है. लेकिन वैभव को गुमनामी से निकालकर इस मुकाम तक पहुंचाने के पीछे एक और बड़ा नाम है— समर कादरी. यह वही पूर्व क्रिकेटर और राजस्थान के स्काउट हैं, जिन्होंने सबसे पहले वैभव की असाधारण प्रतिभा को पहचाना और उनका रुख राजस्थान रॉयल्स की ओर मोड़ा.
कौन हैं वैभव को स्काउट करने वाले समर कादरी?
आईपीएल 2025 के अपने पहले ही मैच की पहली गेंद पर गगनचुंबी छक्का जड़कर वैभव सूर्यवंशी ने पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया था. वैभव ने महज 14 साल की उम्र में यह अविश्वसनीय उपलब्धि हासिल की थी. इसके बाद अगले एक साल और फिर मौजूदा आईपीएल 2026 सीजन में तो वैभव ने देश-विदेश के अंतरराष्ट्रीय गेंदबाजों की लाइन-लेंथ बिगाड़ कर रख दी है.
वैभव की इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता का जुनून, कोच मनीष ओझा की ट्रेनिंग और राजस्थान रॉयल्स के कोचिंग स्टाफ की मेहनत की चर्चा तो हर तरफ होती है, लेकिन समर कादरी के योगदान को भी कम करके नहीं आंका जा सकता:
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कौन हैं समर कादरी: पटना के रहने वाले 36 वर्षीय समर कादरी बिहार और झारखंड क्रिकेट टीम के पूर्व शानदार लेग स्पिनर रह चुके हैं.
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क्रिकेट करियर: समर ने साल 2009 में झारखंड की ओर से अपना घरेलू डेब्यू किया था और बाद में वे बिहार की टीम से खेलने लगे. 2009 से 2021 के अपने करियर में उन्होंने 45 फर्स्ट-क्लास मैचों में 157 विकेट चटकाए. इसके अलावा उन्होंने 18 लिस्ट-ए मैचों में 19 विकेट और 17 टी20 मैचों में 14 विकेट हासिल किए.
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राजस्थान रॉयल्स में भूमिका: संन्यास लेने के बाद पिछले 3-4 सालों से समर कादरी राजस्थान रॉयल्स के साथ एक 'टैलेंट स्काउट' (Talent Scout) के तौर पर जुड़े हुए हैं. उनका मुख्य काम देश के कोने-कोने और छोटे शहरों से छिपी हुई प्रतिभाओं को ढूंढकर फ्रेंचाइजी के सामने लाना है.
वैभव सूर्यवंशी तक कैसे पहुंचे समर कादरी?
समर कादरी ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि आखिर कैसे उनकी नजर वैभव सूर्यवंशी पर पड़ी और वे उन्हें राजस्थान के कैंप तक लेकर आए. समर के मुताबिक, जब वैभव केवल 11-12 साल के बच्चे थे, तभी से स्थानीय क्रिकेट सर्किट में उनके नाम की चर्चा होने लगी थी.
एक दिन पटना में ही एक स्थानीय मैच के दौरान समर कादरी और वैभव का आमना-सामना हुआ. उस मैच में वैभव ने जो किया, उसने समर को हैरान कर दिया. महज 11-12 साल के उस छोटे से लड़के ने मैदान पर सीनियर गेंदबाजों के खिलाफ करीब 50 गेंदों में ही ताबड़तोड़ शतक ठोक दिया था. वैभव के बल्ले की इस गूंज और निडर शॉट सिलेक्शन को देखकर समर कादरी समझ गए थे कि यह लड़का कोई आम खिलाड़ी नहीं है. इसके बाद उन्होंने तुरंत इसकी जानकारी राजस्थान रॉयल्स के थिंक-टैंक को दी और अंततः वैभव को राजस्थान के ट्रायल्स में शामिल होने का मौका मिला, जहां से उनकी किस्मत पूरी तरह बदल गई.