बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। पिछले तीन दिनों से शहर में आसमान से आग बरस रही है और तापमान लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में पारा 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका जताई है। झुलसाने वाली गर्मी का असर अब आम जनजीवन के साथ-साथ पर्यटन, खेती और पशु-पक्षियों पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
प्रचंड गर्मी के कारण काशी के घाटों पर सुबह 10 बजे के बाद सन्नाटा पसरने लगा है। अस्सी घाट से लेकर नमो घाट तक श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही काफी कम हो गई है। घाटों पर पूजा-पाठ कराने वाले पुरोहितों की चौकियां भी खाली नजर आ रही हैं। होटल और लॉज संचालकों का कहना है कि बुकिंग में करीब 50 फीसदी तक गिरावट आई है। बाहर से आए पर्यटकों का कहना है कि घाटों पर गर्मी इतनी ज्यादा है कि बिना गैस के ही चावल पक जाएं।
भीषण गर्मी को देखते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर में जर्मन हैंगर तकनीक से टेंट लगाए गए हैं, ताकि लोगों को धूप से राहत मिल सके। इसके अलावा कूलर, मिस्ट फैन और पीने के पानी की व्यवस्था भी की गई है। वहीं नगर निगम की ओर से सड़कों पर पानी का छिड़काव कराया जा रहा है और पौधों को बचाने के लिए भी लगातार सिंचाई की जा रही है।
गर्मी का असर खेती और वन्यजीवों पर भी पड़ रहा है। सब्जी फसलों को पहले से दोगुना पानी देना पड़ रहा है, जिससे किसानों की लागत बढ़ गई है। तरबूज, भिंडी, लौकी, ककड़ी और नेनुआ जैसी फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। दूसरी ओर सारनाथ स्थित मिनी जू में जानवरों और पक्षियों को बचाने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। बाड़ों को ग्रीन नेट से ढका गया है और जानवरों के लिए पानी व ठंडक के अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं।