अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) अपने 'आर्टेमिस' (Artemis) मून मिशन को और मजबूत करने के लिए एक बेहद अनोखी और साहसिक योजना पर विचार कर रही है। नासा के नए मून बेस (Moon Base) प्रोग्राम अपडेट के अनुसार, एजेंसी मंगल ग्रह (Mars) के मिशनों के लिए पृथ्वी पर बनाए गए एक बैकअप रोवर (स्पेयर मॉडल) को मॉडिफाई करके चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) पर भेजने की तैयारी कर रही है।
इस मून रोवर को PROMISE (Polar Rover for Observation, Mapping and In-Situ Exploration) नाम दिया गया है।
'प्रॉमिस' (PROMISE): मार्स टेस्ट रोवर से लूनर एक्सप्लोरर तक
अब तक इस रोवर को 'OPTIMISM' के नाम से जाना जाता था। यह नासा के प्रसिद्ध मार्स रोवर्स—'क्यूरियोसिटी' (Curiosity) और 'परसवेरेंस' (Perseverance) का फुल-स्केल इंजीनियरिंग मॉडल है। जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी (JPL) में वैज्ञानिक सालों से इसका उपयोग मंगल ग्रह पर मौजूद रोवर्स को कोई भी कमांड या सॉफ्टवेयर अपडेट भेजने से पहले टेस्टिंग करने के लिए कर रहे थे।
नासा के एडमिनिस्ट्रेटर जारेड इसाकमैन ने स्टार वॉर्स (Star Wars) फिल्म के योडा का मशहूर डायलॉग कोट करते हुए मज़ाकिया अंदाज़ में कहा, "देयर इज़ अनदर" (यानी हमारे पास एक और रोवर है)। उन्होंने बताया कि मंगल ग्रह पर रोवर्स को चलाने का अब नासा के पास इतना अनुभव हो चुका है कि इस बैकअप रोवर की टेस्ट प्लेटफॉर्म के रूप में अब उतनी जरूरत नहीं है, इसलिए इसे सीधे अंतरिक्ष मिशन पर भेजा जा सकता है।
परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power) बनेगी चाँद पर सबसे बड़ा हथियार
चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर इस रोवर को भेजने की सबसे बड़ी वजह इसका पावर सिस्टम है। आमतौर पर चाँद पर भेजे जाने वाले रोवर सोलर पैनल (सौर ऊर्जा) से चलते हैं, लेकिन 'प्रॉमिस' रोवर में आरटीजी (Radioisotope Thermoelectric Generator) यानी न्यूक्लियर पावर सिस्टम लगा हुआ है।
- सूरज की रोशनी की जरूरत नहीं: यह सिस्टम रेडियोधर्मी पदार्थ (Plutonium-238) के प्राकृतिक रूप से सड़ने से निकलने वाली गर्मी से बिजली बनाता है।
- अंधेरे क्रेटर्स में भी करेगा काम: चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव ऐसा इलाका है जहाँ कई गड्ढों (Craters) में अरबों सालों से हमेशा अंधेरा और अत्यधिक ठंड रहती है। सोलर रोवर यहाँ काम नहीं कर सकते, लेकिन यह परमाणु ऊर्जा से चलने वाला रोवर बिना धूप के भी हफ्तों तक लगातार काम कर सकेगा।
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
चाँद का दक्षिणी ध्रुव भविष्य में इंसानी बस्तियां (Moon Base) बसाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जाता है कि यहाँ भारी मात्रा में वॉटर आइस (बर्फ के रूप में पानी) मौजूद है। इस पानी का उपयोग भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों के पीने, सांस लेने के लिए ऑक्सीजन बनाने और मंगल ग्रह के आगे के मिशनों के लिए रॉकेट ईंधन तैयार करने में किया जा सकता है। 'प्रॉमिस' रोवर इसी पानी और अन्य संसाधनों की खोज के लिए दुर्गम रास्तों और अंधेरे इलाकों का नक्शा तैयार करेगा।
क्योंकि यह रोवर कार के आकार का है और इसका वजन लगभग 1 टन है, इसलिए इसे चंद्रमा की सतह पर उतारने के लिए नासा को स्पेसएक्स के स्टारशिप (Starship) या ब्लू ओरिजिन के ब्लू मून (Blue Moon) जैसे बड़े लैंडर्स की मदद लेनी होगी। इंजीनियरों का कहना है कि रोवर में लूनर मिशन के हिसाब से कुछ बदलाव करने के बाद यह पूरी तरह से चाँद पर इतिहास रचने के लिए तैयार हो जाएगा।