पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में जून 2020 में हुए गंभीर सैन्य टकराव और वर्षों चले सीमा तनाव के बाद भारत और चीन के रिश्तों में ऐतिहासिक मोड़ देखने को मिल सकता है। बीजिंग और नई दिल्ली के कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत की यात्रा कर सकते हैं। अगर यह प्रस्तावित दौरा फलीभूत होता है, तो अक्टूबर 2019 में मामल्लापुरम अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के बाद लगभग छह वर्षों में यह शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा होगी।
शी जिनपिंग की इस संभावित यात्रा की पृष्ठभूमि तैयार करने के उद्देश्य से दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय रणनीतिक संवाद तेज हो गए हैं। भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के जल्द ही बीजिंग का दौरा करने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए बने कार्य तंत्र (WMCC) की आगामी बैठक और सीमा वार्ता के विशेष प्रतिनिधियों की द्विपक्षीय चर्चाओं को आगे बढ़ाने की रूपरेखा पर काम चल रहा है।
वैश्विक कूटनीति के लिहाज से यह दौरा बहुआयामी महत्व रखता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापारिक शुल्कों (Tariffs) तथा पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, दोनों एशियाई महाशक्तियों का एक मंच पर आना वैश्विक आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग के बीच संभावित द्विपक्षीय वार्ता में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्त व्यवस्था, व्यापार असंतुलन और क्षेत्रीय सुरक्षा तंत्र जैसे अहम मुद्दों पर सार्थक प्रगति की उम्मीद की जा रही है।