पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब गंभीर सैन्य टकराव में बदलता दिखाई दे रहा है। पिछले 24 घंटे में दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है।
इस बढ़ते तनाव की शुरुआत ईरान की ओर से किए गए जवाबी हमले से हुई, जिसमें जॉर्डन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला हुआ।
जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर मिसाइल हमला
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे के अंदर दो बैलिस्टिक मिसाइलें गिरीं। इनमें से एक मिसाइल फाइटर जेट हैंगर के काफी करीब जाकर विस्फोट हुई।
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। अमेरिकी सेना का कहना है कि वह अपने ठिकानों और सैनिकों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठा रही है।
कुवैत में भी हमले की खबर
ईरान की ओर से किए गए हमलों में कुवैत भी प्रभावित हुआ। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुवैत में एक चीनी कंपनी की इमारत को मिसाइल हमले में नुकसान पहुंचा, जिसमें एक कर्मचारी की मौत की खबर सामने आई है।
इस घटना के बाद खाड़ी देशों में मौजूद विदेशी कंपनियों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
अमेरिकी सैनिकों के लिए सुरक्षा कड़ी
ईरानी हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने अपने जवानों के लिए ऑपरेशनल सिक्योरिटी (OPSEC) नियम और सख्त कर दिए हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जॉर्डन और अन्य खाड़ी देशों में तैनात अमेरिकी सैनिकों के मोबाइल फोन इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है या सुरक्षा कारणों से उन्हें जब्त किया जा सकता है। इसका उद्देश्य सैनिकों की लोकेशन और सैन्य गतिविधियों से जुड़ी जानकारी लीक होने से रोकना है।
खाड़ी क्षेत्र पर बढ़ा खतरा
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में ईरान और उसके सहयोगी समूहों की ओर से आगे भी हमले हो सकते हैं। वहीं, अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि वह अपने सैनिकों और ठिकानों की सुरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
इस बढ़ते तनाव का असर पश्चिम एशिया की सुरक्षा, तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है। दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई बढ़ती है या कूटनीतिक रास्ते से तनाव कम करने की कोशिश होती है।