अदन: पश्चिमी एशियाई देश यमन में सितंबर की शुरुआत से भड़के नए सैन्य संघर्ष ने व्यापक मानवीय त्रासदी का रूप ले लिया है। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन संस्था, अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) द्वारा जारी ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा के नए दौर में बेघर होने वाले नागरिकों की संख्या तेज़ी से बढ़कर दो लाख (201,217) के पार पहुँच चुकी है। हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकारी बलों के बीच लाल सागर तटीय क्षेत्रों तथा रणनीतिक प्रांतों पर नियंत्रण को लेकर जारी भयंकर जंग इस विस्थापन की मुख्य वजह बनी है।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार, मध्य सितंबर में विस्थापितों की संख्या जहाँ लगभग 76,000 दर्ज की गई थी, वहीं महज़ तीन हफ्तों के भीतर यह आंकड़ा तीन गुना हो गया है। देश के 10 से अधिक प्रभावित प्रांतों में ताइज सबसे गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है, जहाँ के अल माफिर और जबल हबशी जैसे इलाकों से सर्वाधिक परिवार पलायन करने पर मजबूर हुए हैं। संकट की भयावहता को देखते हुए आईओएम की महानिदेशक एमी पोप ने वैश्विक समुदाय से तत्काल आपातकालीन सहायता और वित्तीय मदद जुटाने की गुहार लगाई है। इसके अतिरिक्त, जान बचाने के लिए तीन हजार सात सौ से अधिक नागरिक नौकाओं के ज़रिए लाल सागर पार कर पड़ोसी देश जिबूती शरण लेने पहुँचे हैं।
विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि प्रभावित इलाकों में भोजन की भारी किल्लत हो गई है और करीब 75 प्रतिशत परिवार भुखमरी के मुहाने पर खड़े हैं। वर्ष 2022 के युद्धविराम के बाद यह अब तक का सबसे गंभीर सैन्य गतिरोध माना जा रहा है, जिसने लाल सागर के समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।