नई दिल्ली/पेरिस: भारत की आर्थिक प्रगति और वैश्विक निवेश को एक नया विखंडनकारी आयाम देने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपनी पेरिस यात्रा के दौरान फ्रांस के दिग्गज वित्तीय सेवा समूह 'बीएनपी परिबास' (BNP Paribas) के कॉर्पोरेट एवं इंस्टीट्यूशनल बैंकिंग के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी और कार्यकारी चेयरमैन यान जेरार्डिन से एक उच्च स्तरीय मुलाकात की है। भारतीय वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक लॉजिस्टिक्स के अनुसार, इस कूटनीतिक बैठक में दोनों वैश्विक वित्तीय दिग्गजों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को कड़ाई से बढ़ाने और भारत के प्रति अंतरराष्ट्रीय संस्थागत निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को लेकर कड़ा मंथन हुआ।
इस कूटनीतिक चर्चा के दौरान यान जेरार्डिन ने भारतीय अर्थव्यवस्था की कड़क सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि दुनिया भर के बड़े निवेश कोष और वित्तीय घराने भारत को एक बेहद भरोसेमंद, स्थिर और सुरक्षित निवेश केंद्र के रूप में विलेख मान्यता दे रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से भारत के 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) की अभूतपूर्व मजबूती की तारीफ की, जिसने वैश्विक बैंकिंग क्षेत्र के सामने एक नया तकनीकी सुरक्षा कवच और बेंचमार्क स्थापित किया है। इसके कड़े जवाब में, वित्त मंत्री सीतारमण ने उन्हें भारत सरकार के आगामी आर्थिक सुधारों के विधिक रोडमैप से अवगत कराया।
वित्त मंत्री सीतारमण ने इस मुलाकात में एक बड़ा विखंडनकारी खुलासा करते हुए बताया कि सरकार ने भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के भविष्य के विकास को कड़ाई से संचालित करने के लिए एक विशेष कूटनीतिक कमेटी के गठन का विलेख निर्णय लिया है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने बजट सत्र के लॉजिस्टिक्स के तहत वर्ष 2047 तक भारतीय बैंकिंग प्रणाली के व्यापक आधुनिकीकरण और वैश्विक एकीकरण के उद्देश्य से इस उच्च स्तरीय विधिक समिति की स्थापना की रूपरेखा तैयार की है। यह कड़ा नीतिगत कदम आने वाले समय में देश के बैंकिंग सुरक्षा ढांचे और वित्तीय समावेशन को एक नई कड़क दिशा प्रदान करेगा, जिससे वैश्विक कोषों के लिए भारतीय बाजार में निवेश के विखंडनकारी द्वार खुलेंगे।