बनारस न्यूज डेस्क: अयोध्या राम मंदिर में दान राशि संग्रह में कथित अनियमितताओं के मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से छह वाराणसी की निजी सुरक्षा एजेंसी 'सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज' के पेरोल पर थे। यह एजेंसी भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की अयोध्या स्थित नया घाट शाखा को हाउसकीपिंग कर्मी उपलब्ध कराती थी। मामले में एजेंसी का नाम सामने आने के बाद विशेष जांच दल (SIT) बुधवार को वाराणसी पहुंचा और एजेंसी के संचालक गौरव सिंह से पूछताछ की।
गौरव सिंह ने दावा किया कि उनकी एजेंसी ने कभी भी अयोध्या राम मंदिर में किसी कर्मचारी की तैनाती नहीं की। उन्होंने बताया कि एसबीआई की नया घाट शाखा ने 1 अप्रैल 2025 से हाउसकीपिंग स्टाफ उपलब्ध कराने का अनुबंध किया था, जिसके तहत पहले 15 और बाद में कुल 19 कर्मचारियों की तैनाती की गई। उनका कहना है कि एजेंसी की जिम्मेदारी केवल बैंक को हाउसकीपिंग कर्मी उपलब्ध कराना थी और कर्मचारियों को बैंक परिसर में कौन-सा कार्य सौंपा गया, इसकी जानकारी एजेंसी को नहीं थी।
एजेंसी संचालक के अनुसार गिरफ्तार छह कर्मचारी—अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और राम शंकर मिश्रा—पहले से ही किसी अन्य एजेंसी के माध्यम से एसबीआई की उक्त शाखा में कार्यरत थे। बाद में बैंक की सिफारिश पर उन्हें सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के माध्यम से दोबारा नियुक्त किया गया। उन्होंने कहा कि यदि इन कर्मचारियों को दान राशि की गिनती या अन्य बैंकिंग कार्यों में लगाया गया था, तो यह निर्णय पूरी तरह बैंक का था।
गौरव सिंह ने स्पष्ट किया कि उनकी एजेंसी का अनुबंध केवल एसबीआई की नया घाट शाखा के साथ था, न कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के साथ। उन्होंने कहा कि एजेंसी को कर्मचारियों की कथित भूमिका या दान राशि से जुड़े किसी कार्य की जानकारी नहीं थी और इस मामले में एजेंसी की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है।