वाराणसी। अयोध्या की तरह ज्ञानवापी मस्जिद के निर्माण से पहले उस स्थान पर एक हिंदू मंदिर था। इसको लेकर लंबे समय से चल रही सर्वे रिपोर्ट सामने आ गई है। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वंस कर मस्जिद बनाये जाने के विवाद में ASI से कराई गई जांच में इस बात की पुष्टि हो गई कि वहां कभी मंदिर था। गुरूवार को अदालत के आदेश पर हिंदू और मुस्लिम पक्ष को सर्वे रिपोर्ट की कापी मिल गई। सर्वे रिपोर्ट की कॉपी दोनों पक्षों को मिली है। एएसआई ने 92 दिनों तक वैज्ञानिक विधि से सर्वे किया था।
तो आइये जानते हैं कि ASI सर्वे रिपोर्ट में क्या-क्या है -
ASI की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में जो ढांचा है उसकी पश्चिमी दीवार पहले से ही हिंदू मंदिर का हिस्सा है। साथ ही वहां के खंभों में बनी नक्काशी को मिटाने की कोशिश की गई है। इतना ही नहीं यह भी दावा किया गया है कि जो दलीलें हिंदू पक्ष ने दी थी उसे सही पाया गया है। रिपोर्ट में कुछ ऐसे अंश पाए गए हैं जो अयोध्या की भी याद दिला रही है। रिपोर्ट आने के बाद हिंदू पक्ष का मानना है कि जिस तरह से कानूनी लड़ाई के बाद अयोध्या का फैसला उनके पक्ष में आया है उसी तरह से ज्ञानवापी मामले में भी फैसला उनकी तरफ आएगा।
क्या है सर्वे रिपोर्ट का निष्कर्ष-
भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण (एएसआई) इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि ज्ञानवापी मस्जिद के निर्माण से पहले वहां एक बड़ा हिंदू मंदिर मौजूद था। मस्जिद से पहले वहां बने मंदिर में एक बड़ा कक्ष और उत्तर में छोटा कक्ष था । मौजूदा मस्जिद में अंकित पत्थरों में अरबी और फारसी से अंकित शिलालेख
मस्जिद के तहखाने में मिले मिले मूर्तिकला के अवशेष
खंभो और स्तम्भों की कलाकृति-
ASI रिपोर्ट में पाया गया कि मस्जिद में बने खंभों और स्तम्भों में जो नक्काशी हुई है वह हिंदू धर्म के मंदिर का हिस्सा थे। उनके पुन: उपयोग के लिए उनकी जगह फूल लगा दिए गए।
ढांचे से पाए गए 34 शिलालेख
ढांचे से 34 शिलालेख पाए गए थे। इनमें से 32 शिलालेखों की प्रतिकृतियां बनाई गईं। जिसमें देवनागरी, ग्रंथ, तेलुगु और कन्नड़ लिपियों में पाए गए हैं। जबकि तीन देवताओं के नाम – जनार्दन, रुद्र और उमेश्वर भी पाए गए।