बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी में बेहतर सड़कें और हाईवे बनने के बाद सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। पहले खराब सड़कें दुर्घटनाओं की बड़ी वजह मानी जाती थीं, लेकिन अब चौड़ी और सीधी सड़कों पर तेज रफ्तार वाहन लोगों की जान ले रहे हैं। पिछले चार वर्षों में हाईवे, रिंग रोड, फोरलेन और सिक्सलेन मार्गों पर ओवरस्पीड के कारण 250 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा सड़क पार करते समय 130 पैदल यात्रियों ने भी जान गंवाई।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021 के बाद सड़क हादसों में मौत के मामलों में 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2022 में ओवरस्पीड से 46 लोगों की मौत हुई थी, जो 2025 में बढ़कर 87 पहुंच गई। हादसों में जान गंवाने वालों में करीब 70 प्रतिशत युवा थे, जिनकी उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच थी।
पुलिस जांच में सामने आया कि हादसों में शामिल 23 प्रतिशत लोग एक से दो साल पुरानी बाइक चला रहे थे। शहर की तुलना में आउटर और ग्रामीण इलाकों में ज्यादा दुर्घटनाएं हुईं। कैंट-राजघाट मार्ग, लहरतारा ओवरब्रिज-रोहनिया रोड, फुलवरिया आरओबी-सेंट्रल जेल रोड, ककरमत्ता-अखरी बाइपास और रामनगर-पड़ाव मार्ग सबसे अधिक दुर्घटना वाले क्षेत्रों में शामिल रहे। वहीं, सड़क हादसों में हर सातवीं मौत महिला की दर्ज की गई।
बीते वर्ष की सड़क हादसा रिपोर्ट के अनुसार सुबह 6 से 9 बजे और रात 11 बजे से 2 बजे के बीच सबसे ज्यादा हादसे हुए। नशे में वाहन चलाने के 39 मामलों में 28 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, शराब के नशे में हुई दुर्घटनाओं में 89 प्रतिशत पीड़ितों की जान चली गई।
एडीसीपी ट्रैफिक अंशुमान मिश्रा ने बताया कि सड़क हादसों को रोकने के लिए ओवरस्पीड, नशे में ड्राइविंग और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। दुर्घटना संभावित स्थानों पर स्पीड चेकिंग और जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि सड़क खाली होने पर भी तेज रफ्तार से वाहन न चलाएं और यातायात नियमों का पालन करें।