आज के डिजिटल दौर में जब लोग जीवनसाथी की तलाश के लिए मैट्रिमोनी (वैवाहिक) साइट्स का रुख कर रहे हैं, साइबर अपराधी उन्हें अपना शिकार बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा ले रहे हैं। जेनरेटिव एआई (Generative AI), डीपफेक और वॉयस क्लोनिंग जैसी तकनीकों ने मैट्रिमोनियल घोटालों (Matrimony Scams) को इतना वास्तविक बना दिया है कि असली और नकली प्रोफाइल में फर्क करना नामुमकिन होता जा रहा है।
हाल ही में सामने आए एक मामले में, 35 वर्षीय एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को एक मैट्रिमोनी प्लेटफॉर्म पर एक महिला आर्किटेक्ट की प्रोफाइल से रिक्वेस्ट मिली। महिला की तस्वीरें पेशेवर थीं, दस्तावेज सत्यापित लग रहे थे और सोशल मीडिया पर भी वह सक्रिय थी। हफ्तों तक सामान्य बातचीत और वीडियो कॉल्स के बाद जब भरोसा पूरी तरह कायम हो गया, तो उसने विदेशी मुद्रा व्यापार (Forex Trading) में निवेश कर सुरक्षित मुनाफे का झांसा दिया। इंजीनियर ने लाखों रुपये निवेश कर दिए, लेकिन जब पैसे निकालने की बारी आई, तो वह प्लेटफॉर्म गायब हो गया। बाद में जांच में पता चला कि उस नाम की कोई महिला थी ही नहीं; उसकी तस्वीरें, वीडियो कॉल्स और दस्तावेज सब कुछ एआई की मदद से तैयार किए गए थे।
साइबर सुरक्षा फर्म 'ब्यूरो' की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन रोमांस और मैट्रिमोनी स्कैम के मामले में भारत अब दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है, जो वैश्विक स्तर पर ऐसे कुल घोटालों का 12 प्रतिशत है। गुजरात के सूरत से लेकर केरल के कोच्चि तक, पुलिस लगातार ऐसे सिंडिकेट्स का भंडाफोड़ कर रही है।
पहले से कहीं ज्यादा शातिर हुए अपराधी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पहले के स्कैमर्स इंटरनेट से चुराई गई तस्वीरों और फर्जी नामों का इस्तेमाल करते थे, जिन्हें पकड़ना आसान था। लेकिन अब अपराधी निम्नलिखित एआई टूल्स का उपयोग कर रहे हैं:
- एआई-जेनरेटेड चेहरे: ऐसे चेहरे बनाना जो असल में दुनिया में हैं ही नहीं, ताकि कोई उन्हें रिवर्स-इमेज सर्च से न पकड़ सके।
- डीपफेक वीडियो और वॉयस टेक्नोलॉजी: वीडियो कॉल पर लाइव बात करते समय चेहरे और आवाज को बदल देना, जिससे पीड़ित को लगता है कि वह वास्तव में उसी व्यक्ति से बात कर रहा है।
- समय और भरोसे का निवेश: अपराधी तुरंत पैसे नहीं मांगते। वे हफ्तों या महीनों तक बातचीत कर पहले गहरा भावनात्मक रिश्ता और भरोसा बनाते हैं, फिर किसी मेडिकल इमरजेंसी या 'शानदार' निवेश योजना के बहाने पैसे ऐंठते हैं।
इन 'रेड फ्लैग्स' (चेतावनी के संकेतों) को न करें नजरअंदाज
साइबर एक्सपर्ट्स ने कुछ मुख्य बातें बताई हैं जिन पर ध्यान देना बेहद जरूरी है:
- बहुत जल्दी भावनात्मक रूप से जुड़ना: यदि कोई बहुत कम समय में अत्यधिक प्यार या गहरा भरोसा दिखाने लगे।
- परफेक्ट दिखने वाली प्रोफाइल: ऐसी प्रोफाइल जिसकी तस्वीरें जरूरत से ज्यादा परफेक्ट या एडिटेड लगें और व्यक्तिगत जानकारियां बहुत कम हों।
- आमने-सामने मिलने या लाइव कॉल से बचना: कोई न कोई बहाना बनाकर वीडियो कॉल टालना या परिवार से बात न करना।
- जल्दी से प्लेटफॉर्म बदलना: मैट्रिमोनी ऐप छोड़कर बहुत शुरुआत में ही वॉट्सऐप या किसी अन्य पर्सनल चैटिंग ऐप पर आने की जिद करना।
- पैसों या निवेश की बात छेड़ना: जान-पहचान के कुछ ही समय बाद किसी मजबूरी (जैसे कस्टम ड्यूटी, मेडिकल खर्च) के लिए पैसे मांगना या किसी बिजनेस/फॉरेक्स में निवेश का दबाव बनाना।
अगर आप शिकार हो जाएं तो क्या करें?
- तुरंत बातचीत बंद करें: स्कैमर से तुरंत सारे संपर्क तोड़ दें और उन्हें कोई अतिरिक्त पैसा न भेजें।
- सबूत सुरक्षित रखें: चैट हिस्ट्री, स्क्रीनशॉट, पेमेंट रसीदें, मोबाइल नंबर और प्रोफाइल लिंक का बैकअप ले लें।
- तुरंत शिकायत दर्ज करें: राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत कॉल करें या सरकारी पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। जितनी जल्दी रिपोर्ट करेंगे, पैसे होल्ड होने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी।
- प्लेटफॉर्म को रिपोर्ट करें: उस फर्जी प्रोफाइल को मैट्रिमोनी ऐप पर भी रिपोर्ट करें ताकि उसे ब्लॉक किया जा सके।
विशेषज्ञों की सलाह: आज के दौर में सिर्फ स्मार्टफोन चलाना जानना काफी नहीं है, बल्कि एक 'स्मार्ट डिजिटल यूजर' बनना जरूरी है। किसी भी ऑनलाइन प्रोफाइल, तस्वीर या वीडियो कॉल पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। आगे बढ़ने से पहले परिवार को शामिल करें और अपने स्तर पर व्यक्ति की पूरी पृष्ठभूमि की स्वतंत्र रूप से जांच जरूर करें।