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Google I/O Connect India 2026, गूगल ने भारतीय शिक्षकों के लिए लॉन्च किया 'ATL Saathi' ऐप

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Posted On:Wednesday, July 15, 2026


बेंगलुरु में आयोजित अपने सालाना इवेंट Google I/O Connect India 2026 में दिग्गज टेक कंपनी गूगल ने भारतीय डेवलपर्स, स्टार्टअप्स और शिक्षकों के लिए कई बड़ी आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) पहलों की घोषणा की है। इस इवेंट में गूगल की एआई रिसर्च यूनिट 'गूगल डीपमाइंड' (Google DeepMind) ने नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के साथ मिलकर 'ATL Saathi' नामक एक खास एआई ऐप लॉन्च किया है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश के स्कूलों में व्यावहारिक और आधुनिक तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देना है। आइए जानते हैं इस इवेंट की मुख्य घोषणाएं और 'ATL Saathi' ऐप की खासियतें।
क्या है 'ATL Saathi' ऐप और यह कैसे काम करेगा?
ATL Saathi एक डेस्कटॉप वेब एप्लीकेशन (Web Application) है, जिसे विशेष रूप से भारत के स्कूलों में चल रहीं अटल टिंकरिंग लैब्स (Atal Tinkering Labs - ATL) के शिक्षकों के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह ऐप गूगल के सबसे शक्तिशाली एआई मॉडल Gemini (जेमिनी) पर आधारित है।
शिक्षण व्यवस्था को आसान बनाने के लिए इसमें कई खास फीचर्स दिए गए हैं:

  • शिक्षकों के लिए एआई असिस्टेंट: यह ऐप शिक्षकों को अटल टिंकरिंग लैब्स के पाठ्यक्रम (Curriculum) को आसानी से पढ़ाने और समझने में मदद करेगा। यह शिक्षकों के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहने वाले प्लानिंग और ट्रेनिंग असिस्टेंट की तरह काम करेगा।
  • इंटरेक्टिव टूल्स और प्रोजेक्ट जनरेशन: इसमें एआई-जनरेटेड इन्फोग्राफिक्स, छोटे वीडियो ओवरव्यू और इंटरैक्टिव क्विज़ शामिल हैं, जो मुश्किल विषयों को आसान बनाते हैं। इसके अलावा, अगर छात्र कोई नया आइडिया लाते हैं, तो यह एआई शिक्षकों को स्टेप-बाय-स्टेप असेंबली निर्देश, वायरिंग डायग्राम और सुरक्षा सावधानियां तैयार करके देगा।
  • बहुभाषी पहुंच (Multilingual Support): भारतीय कक्षाओं की भाषाई विविधता को देखते हुए, शिक्षक अपनी पसंदीदा स्थानीय भाषा में इस एआई असिस्टेंट से बातचीत कर सकते हैं। शुरुआत में यह 8 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है।
  • रोलआउट प्लान: इस साल शुरुआती तौर पर 'ATL Saathi' ऐप को देश के 100 स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत लागू किया जा रहा है। गूगल का दीर्घकालिक लक्ष्य इसे देश के 10,000 स्कूलों तक पहुंचाना है।
शिक्षा और डेवलपर्स के लिए अन्य बड़ी घोषणाएं
गूगल ने इवेंट में भारत के एआई ईकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए कई और महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
1. फ्री 'AI Research Foundations' कोर्स
गूगल डीपमाइंड भारत में एआई टैलेंट को निखारने के लिए 56 घंटे का एक मुफ्त प्रोग्राम शुरू कर रहा है। इसके लिए गूगल ने Nasscom और IISc बेंगलुरु के साथ साझेदारी की है। इस कोर्स के जरिए छात्र और डेवलपर्स लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) को बनाने और उन्हें फाइन-ट्यून (बेहतर) करने की ट्रेनिंग ले सकेंगे। कोर्स पूरा होने पर उन्हें गूगल क्लाउड स्किल बैज और सर्टिफिकेट भी मिलेंगे।
2. लोकल डेटा सुरक्षा पर जोर (On-Premise Cloud)
भारतीय कंपनियों और सरकारी संगठनों की डेटा लोकलाइजेशन (डेटा को देश के भीतर ही रखने) की जरूरतों को पूरा करने के लिए गूगल ने बड़ा कदम उठाया है। अब भारतीय उद्यम 'गूगल डिस्ट्रिब्यूटेड क्लाउड' (Google Distributed Cloud) के जरिए भारत में स्थित डेटा सेंटरों के भीतर ही पूरी तरह से सुरक्षित माहौल में जेमिनी मॉडल्स को चला सकेंगे।
3. 'Gemini Live' में 25 भारतीय भाषाएं
गूगल का रियल-टाइम वॉयस चैट फीचर Gemini Live अब संस्कृत, भोजपुरी और मैथिली सहित 25 भारतीय भाषाओं और बोलियों को सपोर्ट करता है। इससे भारत के ग्रामीण और भाषाई तौर पर विविधता वाले क्षेत्रों में एआई का इस्तेमाल बेहद आसान हो जाएगा।
4. एआई सुरक्षा के लिए 'CAPSEM' टूल
गूगल ने डेवलपर्स के लिए CAPSEM (कैपेबिलिटीज सिक्योरिटी फॉर एजेंट्स) नाम का एक रनटाइम एनवायरनमेंट ओपन-सोर्स (मुफ्त उपलब्ध) किया है। यह किसी एआई एजेंट को एक सुरक्षित वर्चुअल मशीन के अंदर रखता है, ताकि अगर एआई के पास कोई मैलिशियस (खतरनाक) कमांड या प्रॉम्प्ट आए, तो भी पूरा सिस्टम सुरक्षित रहे। इसके अलावा गूगल सुरक्षित एआई पर रिसर्च के लिए IIT दिल्ली और IIT मद्रास के साथ मिलकर काम कर रहा है।
निष्कर्ष
गूगल के इस साल के 'I/O Connect India' इवेंट से साफ है कि कंपनी भारत को सिर्फ एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि एआई इनोवेशन का एक बड़ा केंद्र मानती है। 'ATL Saathi' जैसे क्लासरूम टूल्स और स्थानीय भाषाओं पर गूगल का यह दांव भारत के जमीनी स्तर पर शिक्षा और तकनीकी विकास में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।


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