भारत में स्पैम कॉल्स और ऑनलाइन फ्रॉड से निपटने के लिए टेलीकॉम रेगुलेटर 'ट्राई' (TRAI) और लोकप्रिय कॉलर आईडी ऐप 'ट्रूकॉलर' (Truecaller) के बीच विवाद काफी बढ़ गया है। इस नए विवाद की मुख्य वजह ट्राई का एक नया नियम है, जिसका ट्रूकॉलर के सीईओ ऋशित झुनझुनवाला ने खुलकर विरोध किया है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पूरा मामला क्या है और इससे आम यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
ट्राई (Telecom Regulatory Authority of India) ने टेलीमार्केटिंग और बैंकों के लिए विशेष सीरीज के नंबर तय किए हैं। इसके तहत:
- 140 सीरीज: इसका इस्तेमाल कंपनियां अपने प्रचार (प्रमोशनल कॉल्स) के लिए करती हैं।
- 1600 सीरीज: इसका इस्तेमाल बैंक और वित्तीय संस्थान जरूरी ट्रांजैक्शन या सर्विस से जुड़े कॉल्स के लिए करते हैं।
अब ट्राई का प्रस्ताव है कि ट्रूकॉलर, हाय (Hiya) या हूजकॉल (Whoscall) जैसे ऐप्स इन दोनों सीरीज (140 और 1600) से आने वाले कॉल्स को 'स्पैम' (Spam) के रूप में मार्क या ब्लॉक नहीं कर सकते। अगर ये ऐप्स ट्राई के इस नियम को नहीं मानते हैं, तो वे आईटी एक्ट (IT Act), 2000 की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा (Safe Harbour) को खो सकते हैं।
ट्रूकॉलर ने क्यों जताई आपत्ति?
ट्रूकॉलर के सीईओ ऋशित झुनझुनवाला ने ट्राई के इस कदम की तीखी आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर लिखा कि यह फैसला पूरी तरह से "तर्कहीन" है।
उनका कहना है कि:
- बुजुर्गों और मासूम लोगों को खतरा: ट्रूकॉलर करोड़ों भारतीयों, विशेषकर बुजुर्गों को धोखाधड़ी और स्पैम से बचाने में मदद करता है। इस नियम से धोखेबाजों को खुला मैदान मिल जाएगा।
- भारी संख्या में स्पैम कॉल्स: कंपनी के मुताबिक, भारत में हर दिन 140 और 1600 सीरीज के नंबरों पर यूजर्स द्वारा 1 लाख से अधिक ब्लॉकिंग एक्शन लिए जाते हैं। कुल मिलाकर इन सीरीज के खिलाफ 5 करोड़ से ज्यादा ब्लॉकिंग एक्शन दर्ज हो चुके हैं। अक्टूबर 2025 के बाद से 1600 सीरीज वाले नंबरों को ब्लॉक करने की दर तीन गुना बढ़ गई है।
- कम्युनिटी डेटा को सेंसर करना गलत: ट्रूकॉलर का कहना है कि वे जनता की रिपोर्ट (Community Feedback) के आधार पर स्पैम की पहचान करते हैं। इसे रोकना गलत तत्वों को बढ़ावा देना होगा।
अभी ट्रूकॉलर क्या कर रहा है?
ट्राई के पिछले निर्देशों के बाद, ट्रूकॉलर इन प्रमाणित (Whitelisted) नंबरों को ग्रीन बैज (Green Badge) के साथ दिखाता था। लेकिन जब इन नंबरों से भी लगातार स्पैम कॉल्स आने लगे, तो ट्रूकॉलर ने इनके साथ 'फ्रीक्वेंटली ब्लॉक्ड' (Frequently Blocked) का टैग लगाना शुरू कर दिया। अब ट्राई पूरी तरह से इस टैग या चेतावनी को भी हटाने का दबाव बना रहा है।
आप पर (यूजर्स पर) क्या असर पड़ेगा?
भारत ट्रूकॉलर का सबसे बड़ा बाजार है, जहां इसके 350 मिलियन (35 करोड़) से ज्यादा एक्टिव यूजर्स हैं। साल 2025 में ही भारतीय यूजर्स को 41.68 अरब स्पैम कॉल्स आए थे।
अगर ट्राई का यह प्रस्ताव पूरी तरह कानून बन जाता है, तो कंपनियों द्वारा 140 या 1600 सीरीज से किए जाने वाले कॉल्स पर ट्रूकॉलर आपको चेतावनी नहीं दे पाएगा। नतीजा यह होगा कि आपको कई ऐसे कॉल्स उठाने पड़ सकते हैं जिन्हें आप नहीं चाहते, और स्पैम व स्कैम कॉल्स का खतरा पहले से कहीं अधिक बढ़ सकता है। फिलहाल ट्रूकॉलर इस मामले पर आईटी मंत्रालय (IT Ministry) के सामने अपना पक्ष और डेटा रखने की तैयारी कर रहा है।