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भारतीय अर्थव्यवस्था का अभेद्य किला: वैश्विक उथल-पुथल के बीच रुपये को स्थिर रखने के लिए आरबीआई ने तैयार किया $100 अरब का मजबूत रक्षा कवच

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Posted On:Friday, July 10, 2026

वैश्विक वित्तीय लॉजिस्टिक्स और मौद्रिक विवादों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की मुद्रा को बाहरी झटकों से बचाने के लिए एक बेहद विखंडनकारी और सोची-समझी रणनीति को धरातल पर उतारा है। डॉलर के मुकाबले रुपये की सांख्यिकी स्थिरता को बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक ने 100 अरब डॉलर से अधिक का एक कड़क फॉरवर्ड पोजीशन सुरक्षा कवच तैयार किया है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के नियमों के अनुसार, मई महीने तक यह विशेष फॉरवर्ड बुक 106.7 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। अब जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय हालात सुधर रहे हैं और बाजार में विदेशी निवेश का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो रहा है, आरबीआई इस शॉर्ट डॉलर फॉरवर्ड विलेख को बेहद सधे हुए कदमों से संतुलित करने के नियमों का पालन कर रहा है।

इस कूटनीतिक रणनीति के तहत केंद्रीय बैंक 'शॉर्ट डॉलर फॉरवर्ड पोजीशन' के माध्यम से भविष्य की एक तय तारीख पर डॉलर बेचने और रुपये खरीदने के विधिक वादे पर काम करता है। इससे बिना तुरंत डॉलर खर्च किए घरेलू मुद्रा को एक मुस्तैद सुरक्षा कवच मिल जाता है। इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट रिसर्च की एसोसिएट प्रोफेसर राजेश्वरी सेनगुप्ता और एमके ग्लोबल की अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा के विश्लेषण के अनुसार, इस फॉरवर्ड बुक में शॉर्ट-टर्म पोजीशन ज्यादा हैं, जिसमें करीब 29 अरब डॉलर के सौदे तीन महीने और 51 अरब डॉलर के सौदे एक साल के भीतर परिपक्व हो रहे हैं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में आश्वस्त किया था कि बैंक के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार के कड़क बफर मौजूद हैं, जिससे किसी भी पुराने विवाद या विखंडनकारी दबाव से निपटा जा सकता है।

आरबीआई ने प्रवासी भारतीयों (NRI) से लंबी अवधि की जमा राशि जुटाने के नियमों को आसान करते हुए बैंकों की हेजिंग लागत को पूरी तरह से कवर करने की नई कूटनीतिक पेशकश की है, जिसे पूर्व सेबी सदस्य अनंत नारायण ने भंडार मजबूत करने वाला रणनीतिक कदम बताया है। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की सांख्यिकी संभावना के कारण वैश्विक स्तर पर डॉलर मजबूत हो रहा है, जिससे बैंक ऑफ अमेरिका ग्लोबल रिसर्च के अनुसार रुपया 2026 के अंत तक 98 के स्तर को छू सकता है। इसके बावजूद, तेल की गिरती कीमतों और विदेशी बॉन्ड बाजार में बढ़ते निवेश के बीच आरबीआई ने अपनी इस मजबूत सांख्यिकी और विधिक रणनीति से भारतीय बाजार को पूरी तरह मुस्तैद बनाए रखा है।


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