अंतरिक्ष अन्वेषण (Space Exploration) के क्षेत्र में एलन मस्क की कंपनी SpaceX ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। स्पेसएक्स के फॉल्कन 9 (Falcon 9) रॉकेट ने दुनिया के पहले व्यावसायिक परमाणु-ऊर्जा संचालित (Commercially built nuclear-powered) सैटेलाइट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित कर दिया है।
इस अनोखे और छोटे सैटेलाइट (CubeSat) का नाम BOHR (Betavoltaic Orbital High-Reliability) है, जिसे फ्लोरिडा की एक निजी कंपनी 'सिटी लैब्स' (City Labs) ने तैयार किया है। इसे कैलिफोर्निया के वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से स्पेसएक्स के 'ट्रांसपोर्टर-17' राइडशेयर मिशन के जरिए लॉन्च किया गया।
कैसे काम करती है इसकी 'परमाणु बैटरी'?
आमतौर पर नासा के बड़े गहरे अंतरिक्ष मिशनों (जैसे वोयाजर या मार्स रोवर) में प्लूटोनियम से चलने वाले भारी जनरेटरों का इस्तेमाल होता आया है। लेकिन BOHR सैटेलाइट में इस्तेमाल की गई तकनीक बिल्कुल अलग और बेहद सुरक्षित है:
- नैनोट्रिटियम (NanoTritium) तकनीक: यह सैटेलाइट बिजली बनाने के लिए 'ट्रिटियम' (Tritium - जो कि हाइड्रोजन का एक रेडियोधर्मी रूप है) का इस्तेमाल करता है।
- सीधे बिजली में बदलाव: ट्रिटियम के धीरे-धीरे कमजोर होने (Decay) से 'बीटा कण' (Beta Particles) निकलते हैं। इन कणों की गतिज ऊर्जा को एक सेमीकंडक्टर डिवाइस के जरिए सीधे बिजली में बदल दिया जाता है।
- कम रेडिएशन: ट्रिटियम से बेहद कम मात्रा में रेडिएशन निकलता है, जिससे इसे संभालना और कमर्शियल रॉकेट में लॉन्च करना पूरी तरह सुरक्षित है।
सूरज की रोशनी की कोई जरूरत नहीं
- यद्यपि BOHR सैटेलाइट के बुनियादी सिस्टम को चलाने के लिए अभी भी पारंपरिक सोलर पैनल लगे हैं, लेकिन इसके मुख्य पेलोड (वैज्ञानिक उपकरणों) को पूरी तरह से इस परमाणु बैटरी से पावर दी जा रही है।
- वर्तमान में पारंपरिक सैटेलाइट्स की सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि जब वे अंतरिक्ष में अंधेरे वाले हिस्से में जाते हैं, तो उनके सोलर पैनल काम करना बंद कर देते हैं। लेकिन यह न्यूक्लियर पावर्ड पेलोड बिना सूरज की रोशनी और बिना किसी पारंपरिक बैटरी लाइफ की पाबंदी के लगातार 20 से अधिक वर्षों तक बिना रुके काम कर सकता है।
चंद्रमा और गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए मील का पत्थर
'सिटी लैब्स' के सीईओ पीटर कबाउय ने एक बयान में कहा, "अंतरिक्ष में कमर्शियल न्यूक्लियर पावर के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम है।"
यह तकनीक भविष्य के उन मिशनों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी जो चंद्रमा के 'परमानेंटली शैडो रीजंस' (Permanently Shadowed Regions - जहाँ कभी धूप नहीं पहुँचती) में भेजे जाएंगे। नासा का आर्टेमिस मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर इंसानी बस्ती बसाने की तैयारी कर रहा है, जहाँ विशाल गड्ढों में पानी की बर्फ जमी है। वहाँ खोज करने वाले रोवर्स और सेंसर्स को बिना धूप के जिंदा रखने के लिए यह तकनीक सबसे सटीक समाधान है।
कड़े सुरक्षा टेस्ट के बाद मिली मंजूरी
अंतरिक्ष में परमाणु सामग्री भेजना बेहद संवेदनशील माना जाता है। BOHR सैटेलाइट अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) के कड़े परमाणु लॉन्च नियमों और सुरक्षा मानकों को सफलतापूर्वक पास करने वाला पहला कमर्शियल सैटेलाइट बन गया है। इसकी सुरक्षा रिपोर्ट की गहन समीक्षा 'सैंडिया नेशनल लैबोरेट्रीज' (Sandia National Laboratories) द्वारा की गई थी।
इस सफल लॉन्चिंग के बाद अब अंतरिक्ष में केवल सोलर एनर्जी पर निर्भरता खत्म होने की शुरुआत हो गई है, जो आने वाले समय में चंद्रमा, मंगल और उससे भी आगे के मिशनों को और अधिक स्वतंत्र और शक्तिशाली बनाएगी।