क्रिकेट जगत से इस वक्त एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। अफगानिस्तान क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने वाले और अपनी तूफानी गेंदबाजी से दुनिया भर के बल्लेबाजों के दिलों में खौफ पैदा करने वाले पूर्व स्टार तेज गेंदबाज शपूर जादरान (Shapoor Zadran) का निधन हो गया है। 7 जुलाई को महज 38 साल की उम्र में उन्होंने अपनी अंतिम सांसें लीं।
इस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि शपूर जादरान आज यानी 8 जुलाई को अपना 39वां जन्मदिन मनाने वाले थे। जिस दिन उनके घर में उनके जन्मदिन का जश्न मनाया जाना था, ठीक उसी दिन उनका पार्थिव शरीर उनके घर पहुंचा। इस मंजर ने न केवल उनके परिवार को बल्कि दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों को पूरी तरह से तोड़कर रख दिया है।
काबुल पहुंचा पार्थिव शरीर, नम आंखों से दी गई विदाई
दिग्गज तेज गेंदबाज शपूर जादरान का पार्थिव शरीर बुधवार (8 जुलाई) को अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पहुंचा। उनके अंतिम दर्शन के लिए क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों, साथी खिलाड़ियों और हजारों प्रशंसकों की भीड़ उमड़ पड़ी। मैदान पर हमेशा जोश और आक्रामकता से भरे रहने वाले इस खिलाड़ी की इस तरह असमय विदाई से हर कोई स्तब्ध है।
शपूर जादरान को क्रिकेट इतिहास में हमेशा एक ऐसे योद्धा के रूप में याद किया जाएगा, जिसने बेहद विपरीत परिस्थितियों में अफगानिस्तान में क्रिकेट के पौधे को सींचा और उसे एक वटवृक्ष बनाया।
लंबे बाल, आक्रामक रन-अप और सहवाग-गंभीर से वो टक्कर
शपूर जादरान सिर्फ अपनी बेहतरीन गेंदबाजी के लिए ही नहीं, बल्कि मैदान पर अपने अनोखे अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। उनके लंबे बाल, उनका लंबा और आक्रामक रन-अप और विकेट लेने के बाद हवाई जहाज की तरह जश्न मनाने का स्टाइल फैंस को बेहद पसंद आता था।
मैदान पर अपनी रफ्तार और स्विंग से उन्होंने कई बार भारतीय बल्लेबाजों को भी खासा परेशान किया था। विशेषकर भारत के दिग्गज सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर जैसे खूंखार बल्लेबाजों के सामने भी शपूर कभी अपनी रफ्तार कम नहीं करते थे। भारतीय पिचों और भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ उनके कड़े मुकाबले आज भी क्रिकेट प्रशंसकों के जेहन में ताजा हैं।
अफगान क्रिकेट के सुनहरे दौर के नायक
शपूर जादरान उस ऐतिहासिक अफगानी टीम के मुख्य स्तंभ थे, जिसने साल 2015 के वनडे वर्ल्ड कप में पहली बार क्वालीफाई कर इतिहास रचा था। स्कॉटलैंड के खिलाफ 2015 विश्व कप के मैच में जब टीम संकट में थी, तब शपूर ने ही अंतिम ओवरों में चौका लगाकर अफगानिस्तान को वर्ल्ड कप इतिहास की पहली ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। जीत के बाद उनके दौड़ने का वह नजारा आज भी विश्व क्रिकेट की सबसे यादगार तस्वीरों में से एक है।
उन्होंने अफगानिस्तान के लिए 44 वनडे और 36 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले, जिसमें उन्होंने अपनी धारदार गेंदबाजी से देश को कई मैच जिताए। उनका इस तरह अचानक चले जाना विश्व क्रिकेट, विशेषकर अफगान क्रिकेट के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई नामुमकिन है। खेल जगत अपने इस जांबाज खिलाड़ी को हमेशा याद रखेगा।