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जंग के मैदान में बढ़त बनाने के लिए 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' का इस्तेमाल कर रहे हैं आतंकी संगठन

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Posted On:Monday, July 13, 2026

इंटरनेट और सोशल मीडिया के बाद अब आतंकवादी संगठनों ने युद्ध के मैदान और अपनी हिंसक गतिविधियों में बढ़त हासिल करने के लिए सबसे आधुनिक तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लेना शुरू कर दिया है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के 'कैम्ब्रिज प्रोग्राम ऑन एआई साइंस एंड पॉलिसी' (CASP) की एक हालिया और चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, चरमपंथी संगठन अब केवल प्रोपेगैंडा (दुष्प्रचार) फैलाने के लिए ही नहीं, बल्कि बम बनाने और घातक हमलों की रणनीतियां तैयार करने के लिए फ्रंटियर एआई और चैटबॉट्स (जैसे ChatGPT और Gemini) का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं।
चैटबॉट्स से ले रहे हैं बम बनाने की ट्रेनिंग
सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इन एआई टूल्स में लगे सुरक्षा सुरक्षा उपायों (Safety Guards) को चकमा देकर आतंकी तकनीकी मार्गदर्शन हासिल कर रहे हैं। नाइजीरिया के खूंखार आतंकवादी संगठन बोको हरम (Boko Haram) पर की गई इस रिसर्च में सामने आया है कि उसके लड़ाकों ने आईईडी (IED) और अन्य बम बनाने, हथियारों को मॉडिफाई करने और जंग के मैदान में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए एआई चैटबॉट्स से कदम-दर-कदम (step-by-step) निर्देश हासिल किए हैं।
इंटरनेट सिक्योरिटी और मानवाधिकारों का उल्लंघन: एआई का यह दुरुपयोग न केवल डिजिटल सुरक्षा बल्कि सीधे तौर पर इंसानी जीवन के लिए बड़ा खतरा बन गया है। एआई की मदद से तैयार की गई रणनीतियों के कारण कई सफल आतंकी हमले हुए हैं, जिनमें सैकड़ों मासूमों की जान गई है।
जब फिल्म का सीन दोहराने के लिए एआई की मदद ली
रिपोर्ट में आतंकियों की पूछताछ और उनके अनुभवों के हवाले से एक बेहद हैरान करने वाला उदाहरण सामने आया है। बोको हरम के आतंकियों ने बताया कि उन्होंने एक फिल्म में मोटरसाइकिल को पुल के ऊपर से छलांग लगाते हुए देखा था। इस पैंतरे को असल हमले में शामिल करने के लिए उन्होंने एआई चैटबॉट का इस्तेमाल किया।
आतंकियों ने चैटबॉट को अपनी मोटरसाइकिल का मॉडल, वजन और जितनी दूरी तय करनी थी, उसकी सटीक जानकारी दी। एआई ने उन्हें पूरा तरीका सिखाया कि इस स्टंट को कैसे अंजाम देना है। आतंकियों ने अभ्यास करने के लिए जमीन में गड्ढे खोदे, जिनमें कांच के टुकड़े और आग भरी। हालांकि, इस खतरनाक अभ्यास के दौरान उनके 18 लड़ाके मारे गए, लेकिन 8 आतंकी इसे सीखने में कामयाब रहे और अगले हमले में उन्होंने इस एआई-प्रशिक्षित पैंतरे का इस्तेमाल कर सुरक्षा बलों को चौंका दिया।
सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई ने एक तरह से आतंकियों के लिए "एडवांस वेपन इंजीनियर" और "टैक्टिकल कमांडर" की कमी को पूरा कर दिया है। पहले जिन जटिल तकनीकों या रणनीतियों को सीखने में उन्हें सालों लगते थे, अब एआई के जरिए वे कुछ ही मिनटों में उपलब्ध हैं।
थिंक टैंक सीएसआईएस (CSIS) के विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक चरमपंथियों के लिए दुष्प्रचार, भर्ती और हमलों की प्लानिंग की बाधाओं को बहुत कम कर रही है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां भी काउंटर-टेररिज्म (आतंकवाद विरोधी अभियानों) में एआई और सर्विलांस का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं, लेकिन ओपन-सोर्स एआई टूल्स का आतंकियों के हाथ लगना आने वाले समय में वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बेहद गंभीर और 'इंटरेस्टिंग' चुनौती बनने जा रहा है।


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